जयपुर। राजस्थान सरकार ने सरकारी स्कूलों के कमजोर और जर्जर आधारभूत ढांचे को सुधारने के लिए बड़ा रोडमैप तैयार किया है। सरकार की योजना के तहत वर्ष 2026-27 से 2028-29 के दौरान करीब ₹12,500 करोड़ खर्च कर सरकारी स्कूलों को सुरक्षित, आधुनिक और सुविधायुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
योजना में नए स्कूल भवनों का निर्माण, जर्जर भवनों की मरम्मत एवं जीर्णोद्धार, अतिरिक्त कक्षाओं का निर्माण, शौचालय, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाओं का विकास शामिल है। इसके साथ ही स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब और विद्यार्थियों को टैबलेट उपलब्ध कराने की भी योजना बताई गई है।
611 स्कूलों के पास अपना भवन नहीं
सरकारी स्कूलों की आधारभूत स्थिति को लेकर हाल ही में विधानसभा में सामने आए आंकड़ों ने भी तस्वीर स्पष्ट की है। 611 सरकारी स्कूलों के पास अपना भवन नहीं है। इसके अलावा भवन वाले 2,047 स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए शौचालय की सुविधा नहीं है, जबकि 1,049 स्कूलों में पेयजल सुविधा का अभाव सामने आया है। ये आंकड़े 2025-26 के UDISE डेटा पर आधारित बताए गए हैं।
भवन निर्माण और मरम्मत पर भी जोर
सरकार की कार्ययोजना में भवनविहीन अथवा जर्जर स्कूलों के लिए अलग से प्रावधान किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार स्कूल भवनों के निर्माण के लिए ₹450 करोड़ और मरम्मत एवं जीर्णोद्धार के लिए ₹550 करोड़ का प्रावधान बताया गया है। साथ ही विभिन्न स्रोतों से स्कूल भवनों के निर्माण, मरम्मत और रखरखाव के लिए हर वर्ष लगभग ₹2,500 करोड़ उपलब्ध कराने की योजना सामने आई है।
डिजिटल शिक्षा को भी मिलेगी गति
स्कूलों को केवल भवन और मूलभूत सुविधाओं तक सीमित नहीं रखते हुए सरकार डिजिटल शिक्षा के विस्तार पर भी जोर दे रही है। योजना में 80 हजार टैबलेट, करीब 9 हजार स्मार्ट क्लास और 7 हजार आईसीटी लैब विकसित करने का लक्ष्य बताया गया है। इससे विद्यार्थियों को तकनीक आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सरकार का दावा है कि तकनीकी सर्वे और स्कूलों की जरूरतों के आधार पर चरणबद्ध तरीके से काम किया जाएगा। वहीं विपक्ष ने स्कूलों की मौजूदा स्थिति को लेकर सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में ₹12,500 करोड़ की यह योजना राजस्थान के सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।





