कर्मचारी और एम्प्लॉयर का PF में कितना होता है योगदान? जानिए PF कटने के बाद कैसे तय होती है आपकी इन-हैंड सैलरी

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के मौजूदा नियमों के मुताबिक सामान्य स्थिति में कर्मचारी की ओर से EPF में 12 फीसदी योगदान किया जाता है। वहीं एम्प्लॉयर की ओर से भी कुल 12 फीसदी का योगदान होता है, लेकिन उसके हिस्से का एक भाग कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में चला जाता है।

NSI Admin12 Aug 2026, 02:54 AM5 min read
कर्मचारी और एम्प्लॉयर का PF में कितना होता है योगदान? जानिए PF कटने के बाद कैसे तय होती है आपकी इन-हैंड सैलरी

नई दिल्ली। नौकरीपेशा लोगों की सैलरी में PF यानी प्रोविडेंट फंड एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। हर महीने कर्मचारी की सैलरी से एक निश्चित रकम PF के रूप में कटती है और नियोक्ता यानी एम्प्लॉयर भी अपनी तरफ से योगदान करता है। हालांकि, कई कर्मचारियों को यह जानकारी नहीं होती कि उनके वेतन से वास्तव में कितना PF कट रहा है, एम्प्लॉयर कितना पैसा जमा कर रहा है और PF कटने के बाद उनके हाथ में आने वाली सैलरी यानी इन-हैंड सैलरी कितनी होगी।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के मौजूदा नियमों के मुताबिक सामान्य स्थिति में कर्मचारी की ओर से EPF में 12 फीसदी योगदान किया जाता है। वहीं एम्प्लॉयर की ओर से भी कुल 12 फीसदी का योगदान होता है, लेकिन उसके हिस्से का एक भाग कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में चला जाता है। इसके अलावा एम्प्लॉयर को EDLI और EPF प्रशासनिक शुल्क का भी भुगतान करना होता है।

कर्मचारी की सैलरी से कितना कटता है PF?

सामान्य तौर पर कर्मचारी के Basic Salary + Dearness Allowance (DA) के आधार पर PF की गणना होती है। कर्मचारी के हिस्से से 12 फीसदी राशि EPF में जमा की जाती है। EPFO के अनुसार सामान्य वैधानिक वेतन सीमा 15,000 रुपये प्रति माह है। यानी इस सीमा पर कर्मचारी का सामान्य PF योगदान अधिकतम 1,800 रुपये प्रति माह बनता है।

हालांकि, कुछ कर्मचारी और नियोक्ता आपसी सहमति से 15,000 रुपये से अधिक वेतन पर भी PF योगदान कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में कर्मचारी का PF योगदान 1,800 रुपये से ज्यादा हो सकता है। लेकिन अधिक वेतन पर योगदान करने के लिए संबंधित नियमों के तहत कर्मचारी और नियोक्ता की संयुक्त सहमति जरूरी होती है।

एम्प्लॉयर का 12 फीसदी योगदान कहां जाता है?

एम्प्लॉयर का योगदान सीधे पूरा का पूरा EPF खाते में नहीं जाता। सामान्य स्थिति में एम्प्लॉयर के 12 फीसदी योगदान में से 8.33 फीसदी EPS यानी पेंशन फंड में और शेष 3.67 फीसदी EPF में जाता है। इसके अलावा एम्प्लॉयर को EDLI के लिए 0.50 फीसदी और EPF प्रशासनिक शुल्क भी देना होता है।

उदाहरण के तौर पर यदि PF के लिए मान्य वेतन 15,000 रुपये है तो:

कर्मचारी का योगदान: 12% = 1,800 रुपये

एम्प्लॉयर का कुल PF योगदान: 12% = 1,800 रुपये

एम्प्लॉयर की ओर से EPS: 8.33% = लगभग 1,250 रुपये

एम्प्लॉयर की ओर से EPF: 3.67% = लगभग 550 रुपये

इस तरह कर्मचारी के खाते में कर्मचारी के 1,800 रुपये और एम्प्लॉयर के EPF हिस्से के करीब 550 रुपये जुड़ते हैं, जबकि करीब 1,250 रुपये EPS यानी पेंशन खाते में जाते हैं।

30 हजार बेसिक सैलरी होने पर क्या होगा?

मान लीजिए किसी कर्मचारी की Basic Salary + DA 30,000 रुपये है। यदि कंपनी PF की गणना 15,000 रुपये की वैधानिक सीमा तक कर रही है तो कर्मचारी के वेतन से PF के रूप में 1,800 रुपये ही कटेंगे।

लेकिन अगर कर्मचारी और नियोक्ता ने उच्च वेतन पर PF योगदान का विकल्प अपनाया है तो 30,000 रुपये पर 12 फीसदी के हिसाब से कर्मचारी का योगदान 3,600 रुपये हो सकता है। इसलिए केवल कुल सैलरी देखकर PF की कटौती तय नहीं की जा सकती; यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि कंपनी PF की गणना किस वेतन आधार पर कर रही है।

इन-हैंड सैलरी कैसे निकालें?

इन-हैंड सैलरी वह रकम है जो तमाम लागू कटौतियों के बाद कर्मचारी के बैंक खाते में आती है। इसका आसान फॉर्मूला इस तरह समझा जा सकता है:

इन-हैंड सैलरी = ग्रॉस सैलरी - कर्मचारी का PF - अन्य लागू कटौतियां

अन्य कटौतियों में प्रोफेशनल टैक्स, TDS, इंश्योरेंस, लोन/एडवांस की कटौती या कंपनी की अन्य वैध कटौतियां शामिल हो सकती हैं।

उदाहरण के लिए यदि किसी कर्मचारी की मासिक ग्रॉस सैलरी 50,000 रुपये है और कर्मचारी का PF 1,800 रुपये कट रहा है तथा अन्य कटौतियां 1,200 रुपये हैं, तो अनुमानित इन-हैंड सैलरी होगी:

50,000 - 1,800 - 1,200 = 47,000 रुपये

हालांकि वास्तविक इन-हैंड सैलरी व्यक्ति के वेतन ढांचे और लागू टैक्स व अन्य कटौतियों के आधार पर अलग हो सकती है।

CTC और इन-हैंड सैलरी में अंतर समझना जरूरी

नौकरी के ऑफर में अक्सर कंपनियां CTC यानी Cost to Company बताती हैं। CTC और कर्मचारी की इन-हैंड सैलरी एक जैसी नहीं होती। CTC में एम्प्लॉयर का PF योगदान, ग्रेच्युटी, इंश्योरेंस और अन्य लाभ भी शामिल हो सकते हैं।

इसलिए अगर किसी कर्मचारी का CTC 6 लाख रुपये सालाना है तो यह जरूरी नहीं कि उसे हर महीने 50,000 रुपये बैंक खाते में मिलेंगे। CTC से एम्प्लॉयर के योगदान और अन्य घटकों को अलग करने के बाद ग्रॉस सैलरी तय होती है और फिर कर्मचारी के हिस्से की कटौतियों के बाद इन-हैंड सैलरी सामने आती है।

PF कटौती का फायदा क्या है?

PF में जमा रकम कर्मचारी की लंबी अवधि की बचत होती है। इसमें कर्मचारी के योगदान के साथ एम्प्लॉयर का निर्धारित योगदान भी जुड़ता है। इसके अलावा EPF खाते में जमा राशि पर सरकार द्वारा घोषित दर के अनुसार ब्याज भी मिलता है।

यानी PF सिर्फ सैलरी से होने वाली कटौती नहीं है, बल्कि रिटायरमेंट के लिए तैयार होने वाली सामाजिक सुरक्षा बचत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कर्मचारी अपने EPF खाते की जानकारी और बैलेंस EPFO की सेवाओं के माध्यम से भी देख सकता है।

ध्यान रखने वाली बात

PF की गणना सामान्यतः Basic Salary + DA जैसे PF योग्य वेतन पर होती है, पूरी ग्रॉस सैलरी पर नहीं। वहीं 15,000 रुपये की वेतन सीमा के कारण कई कर्मचारियों के मामले में PF 1,800 रुपये प्रति माह पर सीमित रहता है। हालांकि उच्च वेतन पर PF योगदान की अलग व्यवस्था हो सकती है। इसलिए अपनी सैलरी स्लिप में Basic, PF Wages, Employee PF और Employer PF की एंट्री जरूर जांचनी चाहिए।

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