नई दिल्ली। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, 7 अगस्त 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 14.1 अरब डॉलर बढ़कर 707.002 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। यह करीब चार महीने का उच्चतम स्तर है और जनवरी के बाद किसी एक सप्ताह में हुई सबसे बड़ी बढ़ोतरी बताई जा रही है।
इससे पिछले सप्ताह यानी 31 जुलाई को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 692.866 अरब डॉलर था। महज एक सप्ताह में इसमें 14.136 अरब डॉलर की वृद्धि हुई। इस तेजी में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (Foreign Currency Assets) की बड़ी भूमिका रही, जिनमें करीब 9.9 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई।
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में भी जोरदार वृद्धि
RBI के आंकड़ों के मुताबिक 7 अगस्त तक भारत की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां बढ़कर करीब 574.625 अरब डॉलर हो गईं, जबकि 31 जुलाई को यह 564.680 अरब डॉलर थीं। वहीं देश के स्वर्ण भंडार में भी लगभग 4 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह 108.738 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
इसके अलावा विशेष आहरण अधिकार (SDR) करीब 18.745 अरब डॉलर और IMF में भारत की रिजर्व ट्रेंच पोजिशन करीब 4.894 अरब डॉलर रही। इन सभी घटकों को मिलाकर कुल विदेशी मुद्रा भंडार 707.002 अरब डॉलर दर्ज किया गया।
छह सप्ताह में करीब 40 अरब डॉलर की बढ़ोतरी
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में पिछले कुछ सप्ताह से लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह सप्ताह में देश के रिजर्व में करीब 40 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है। विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए सरकार और RBI की ओर से उठाए गए विभिन्न नीतिगत कदमों को भी इस बढ़ोतरी की प्रमुख वजह माना जा रहा है।
जून से विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए कई उपाय किए गए। इनमें सरकारी कंपनियों और बैंकों की विदेशी उधारी के लिए हेजिंग सुविधाएं, सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेश को प्रोत्साहन तथा बैंकों को विदेशों से विदेशी मुद्रा जमा जुटाने के लिए हेजिंग सुविधा जैसे कदम शामिल हैं।
डॉलर प्रवाह और विदेशी निवेश का भी असर
8 जून से 31 जुलाई के बीच स्वैप सुविधाओं के माध्यम से 40 अरब डॉलर से अधिक का प्रवाह आया। इसी अवधि में विदेशी निवेशकों ने भारत के सरकारी बॉन्ड में 2.5 अरब डॉलर से अधिक का शुद्ध निवेश किया। इससे देश के बाहरी भुगतान संतुलन को मजबूती मिली और विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने में मदद मिली।
रुपये और अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है बढ़ता रिजर्व?
विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है। पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार होने से देश को आयात भुगतान, वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव और रुपये पर दबाव जैसी परिस्थितियों से निपटने में मदद मिलती है। RBI जरूरत पड़ने पर विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए भी इन भंडारों का इस्तेमाल कर सकता है।
इस तरह 707 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार भारत की मजबूत होती बाहरी वित्तीय स्थिति को दर्शाता है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार रिजर्व में बढ़ोतरी के साथ-साथ वैश्विक बाजार की परिस्थितियों, तेल कीमतों, पूंजी प्रवाह और रुपये की चाल पर भी लगातार नजर रखना जरूरी है।





