जयपुर। राजस्थान में अक्षय ऊर्जा के विस्तार को लेकर राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड (RRECL) ने राज्य में प्रस्तावित करीब 45 मेगावाट की अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कराने हेतु टेंडर जारी किया है। यह टेंडर 12 अगस्त 2026 को जारी किया गया है।
प्रस्तावित परियोजनाओं में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और सौर-पवन हाइब्रिड सिस्टम को शामिल किया गया है। परियोजनाओं में आवश्यकता के अनुसार बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को भी जोड़े जाने की संभावना रखी गई है। इससे अक्षय ऊर्जा से बनने वाली बिजली को अधिक प्रभावी तरीके से उपयोग करने और आपूर्ति को अधिक लचीला बनाने में मदद मिल सकती है।
DPR से तय होगी परियोजनाओं की तकनीकी रूपरेखा
RRECL ने इन परियोजनाओं के लिए एक एजेंसी नियुक्त करने के उद्देश्य से निविदा आमंत्रित की है, जो विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करेगी। DPR में परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता, संभावित स्थान, ऊर्जा उत्पादन, आवश्यक बुनियादी ढांचे और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा।
DPR तैयार होने के बाद परियोजनाओं के विकास और क्रियान्वयन की दिशा में आगे की प्रक्रिया तय की जा सकेगी। फिलहाल यह परियोजना DPR तैयार कराने के चरण में है, इसलिए अंतिम परियोजना लागत, स्थान और निर्माण की समयसीमा को लेकर अंतिम जानकारी बाद की प्रक्रिया में सामने आएगी।
सौर और पवन ऊर्जा को एक साथ जोड़ने पर जोर
सौर और पवन ऊर्जा को हाइब्रिड मॉडल में विकसित करने का उद्देश्य दोनों स्रोतों की उपलब्धता का बेहतर उपयोग करना है। राजस्थान में वर्ष के अलग-अलग समय पर सौर विकिरण और पवन ऊर्जा की उपलब्धता अलग-अलग रहती है। ऐसे में हाइब्रिड परियोजनाएं ऊर्जा उत्पादन को अधिक संतुलित बनाने में मदद कर सकती हैं।
बैटरी स्टोरेज को शामिल किए जाने की स्थिति में अतिरिक्त बिजली को संग्रहित कर जरूरत के समय उपयोग करने की क्षमता भी विकसित हो सकती है। इससे ग्रिड पर अक्षय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी को संभालने में मदद मिलने की उम्मीद है।
50 हजार मेगावाट से ज्यादा हुई राजस्थान की अक्षय ऊर्जा क्षमता
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब राजस्थान ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार राज्य की स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता 50,000 मेगावाट के आंकड़े को पार कर चुकी है, जिसमें अकेले सौर ऊर्जा की क्षमता करीब 44,135 मेगावाट बताई गई है।
राजस्थान पहले से ही देश के प्रमुख सौर ऊर्जा उत्पादक राज्यों में शामिल है। ऐसे में नई सौर, पवन और हाइब्रिड परियोजनाओं की तैयारी राज्य की अक्षय ऊर्जा क्षमता को और बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद
नई अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के विकास से राज्य में निजी निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ निर्माण, इंजीनियरिंग, संचालन और रखरखाव से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। साथ ही स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ने से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।
RRECL की यह पहल राजस्थान को सौर, पवन और हाइब्रिड अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं का प्रमुख केंद्र बनाने की राज्य की व्यापक दिशा के अनुरूप है। अब 45 मेगावाट क्षमता वाली प्रस्तावित परियोजनाओं की DPR तैयार होने के बाद इनके स्थान, तकनीकी मॉडल और क्रियान्वयन की आगे की तस्वीर स्पष्ट होगी।





