नई दिल्ली/चंडीगढ़। भारतीय रेलवे हरित परिवहन (Green Transport) की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन (Hydrogen Fuel Cell) से चलने वाली ट्रेन शुक्रवार को हरियाणा के जींद और सोनीपत रेलवे स्टेशनों के बीच अपने पहले सफर पर रवाना होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।
यह ट्रेन 89 किलोमीटर लंबे जींद–सोनीपत रेलखंड पर चलेगी और यह दूरी लगभग 2 घंटे में पूरी करेगी। रेलवे के अनुसार, यह परियोजना देश में स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल रेल परिवहन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
10 कोच, 14 स्टेशन और 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार-देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन में 10 कोच लगाए गए हैं। यह ट्रेन अपने निर्धारित मार्ग पर 14 रेलवे स्टेशनों से होकर गुजरेगी। इसकी अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। रेलवे का कहना है कि इस ट्रेन में यात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

किराया आम यात्रियों की पहुंच में-रेलवे ने इस ट्रेन का किराया भी आम यात्रियों को ध्यान में रखते हुए तय किया है। विभिन्न स्टेशनों के बीच यात्रा के लिए किराया 5 रुपये से 25 रुपये तक रखा गया है, जिससे स्थानीय यात्रियों और दैनिक आवागमन करने वालों को भी इसका लाभ मिल सकेगा।
फूलों से सजाई गई ट्रेन, तैयारियां पूरी-उद्घाटन से पहले ट्रेन को आकर्षक ढंग से फूल-मालाओं और रंग-बिरंगी सजावट से सजाया गया है। जींद और सोनीपत रेलवे स्टेशनों पर विशेष तैयारियां की गई हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, उद्घाटन समारोह के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और रेलवे कर्मचारियों को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम-हाइड्रोजन ट्रेन डीजल की तुलना में कहीं अधिक पर्यावरण-अनुकूल मानी जाती है। इस तकनीक में हाइड्रोजन फ्यूल सेल के माध्यम से बिजली उत्पन्न होती है और इसके संचालन के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं होता, बल्कि केवल जलवाष्प (Water Vapour) निकलती है। इससे वायु प्रदूषण कम होगा और रेलवे के कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।
रेलवे का भविष्य होगा 'ग्रीन'-भारतीय रेलवे का लक्ष्य आने वाले वर्षों में स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा देना है। हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि यह सेवा सफल रहती है तो भविष्य में देश के अन्य रेल मार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन शुरू किया जा सकता है। यह पहल भारत को हरित परिवहन और टिकाऊ विकास (Sustainable Development) के लक्ष्य की ओर एक मजबूत कदम मानी जा रही है।





