नई दिल्ली। प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों को लेकर सीजेपी के बैनर तले जंतर-मंतर पर करीब 35 दिनों तक चला आंदोलन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शनिवार को समाप्त हो गया। हालांकि आंदोलन समाप्त होने के बावजूद इस मुद्दे पर सियासत थमने के बजाय और तेज हो गई है। कांग्रेस समेत विपक्षी दल अब संसद के भीतर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर रहे हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि आंदोलन के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने कथित रूप से अत्यधिक बल प्रयोग किया। पार्टी का कहना है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के छात्रों से माफी मांगनी चाहिए। विपक्ष इसी मांग को लेकर संसद में सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी कर रहा है।
सोमवार को INDIA गठबंधन की अहम बैठक
सूत्रों के अनुसार, संसद के आगामी सत्र में विपक्ष की रणनीति तय करने के लिए सोमवार सुबह राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में INDIA गठबंधन की बैठक होगी। बैठक में प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए बने दो वर्ष पुराने कानून में संशोधन से संबंधित प्रस्तावित विधेयक पर साझा रुख तय किया जाएगा। साथ ही सरकार को किन-किन मुद्दों पर घेरा जाए, इस पर भी विस्तार से चर्चा होगी।
राहुल गांधी ने अमित शाह को लिखा पत्र
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर "बर्बर हमले" का आरोप लगाते हुए इसकी निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
राहुल गांधी ने यह भी पूछा है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित तौर पर पैलेट गन सहित घातक बल के इस्तेमाल की अनुमति किस स्तर पर दी गई थी और क्या इसके लिए गृह मंत्री की मंजूरी ली गई थी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों के साथ इस प्रकार की कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
उधर, भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। पार्टी का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई की और विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रहा है।
आंदोलन भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन इसके राजनीतिक असर अभी खत्म होते नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में आगामी दिनों में संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं।




