नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से दिए गए संबोधन के बाद ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में हथियारबंद नक्सलवाद के खिलाफ देश की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए ऐसी विचारधारा से जुड़े लोगों को लेकर भी आगाह किया था। इसके बाद विपक्ष ने सवाल उठाया कि इस टिप्पणी का निशाना आखिर कौन था।
चिदंबरम ने कहा- ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है। चिदंबरम ने प्रधानमंत्री से यह स्पष्ट करने को भी कहा कि उनके अनुसार ‘दिमागी नक्सल’ कौन हैं। उनके इस बयान के बाद भाजपा ने कांग्रेस नेता पर जोरदार हमला बोल दिया।
रिजिजू ने दी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री के बयान को लेकर सफाई दी। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने विपक्षी नेताओं को व्यक्तिगत रूप से ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा था। रिजिजू के मुताबिक, प्रधानमंत्री का निशाना ऐसी विचारधारा और उन लोगों पर था जो माओवादी सोच का समर्थन करते हैं, संविधान को नहीं मानते या देश की संवैधानिक व्यवस्था और राष्ट्रीय एकता के खिलाफ खड़े होते हैं।
रिजिजू ने इस बहस में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पुराने बयानों का भी हवाला दिया। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि जब मनमोहन सिंह ने नक्सलवाद को देश के सामने बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती बताया था, तब कांग्रेस का रुख क्या था। रिजिजू ने कांग्रेस से मनमोहन सिंह के परिवार से माफी मांगने की मांग भी की।
भाजपा ने चिदंबरम पर बोला हमला
भाजपा नेताओं ने चिदंबरम के बयान को बेहद गंभीर बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सवाल उठाया कि यदि चिदंबरम ने खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहा है तो क्या वह नक्सली विचारधारा से सहमति रखते हैं। भाजपा ने इसे कांग्रेस की नक्सलवाद को लेकर कथित नरम नीति से जोड़ने की कोशिश की।
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने भी चिदंबरम के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का संदर्भ उन लोगों से था जो प्रत्यक्ष रूप से हथियार नहीं उठाते, लेकिन माओवादी विचारधारा और नक्सली गतिविधियों के समर्थन में वैचारिक या अन्य स्तर पर काम करते हैं।
विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस और विपक्षी नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना या नीतियों पर सवाल उठाना किसी को नक्सली विचारधारा से जोड़ने का आधार नहीं हो सकता। विपक्ष ने प्रधानमंत्री से ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के स्पष्ट अर्थ और उसके निशाने को लेकर जवाब मांगा है। इस मुद्दे ने स्वतंत्रता दिवस के बाद राजनीतिक बहस को और तीखा कर दिया है।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर राजनीतिक बयानबाजी का असर सोशल मीडिया पर भी दिखाई दे रहा है। चिदंबरम के बयान के बाद इस शब्द को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं और सोशल मीडिया पर इससे जुड़े अभियान भी तेजी से चर्चा में आए।
विवाद ने पकड़ा राजनीतिक रंग
फिलहाल ‘दिमागी नक्सल’ विवाद में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। भाजपा इसे माओवादी विचारधारा और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस इसे सरकार की आलोचना और राजनीतिक असहमति को निशाना बनाने वाली भाषा बता रही है। आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर यह मुद्दा और गरमाने के आसार हैं।





