पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत का भजनलाल सरकार पर हमला, कलेक्टर-एसपी पर दबाव बनाने का लगाया आरोप

गहलोत ने स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि सरकार चुनाव कराने को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव समय पर कराना लोकतांत्रिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है तथा इसमें अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

NSI Admin17 Aug 2026, 05:58 PM3 min read
पूर्व मुख्यमंत्री  गहलोत का भजनलाल सरकार पर हमला, कलेक्टर-एसपी पर दबाव बनाने का लगाया आरोप

दबाव चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है-गहलोत

जयपुर। राजस्थान की राजनीति में स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भजनलाल शर्मा सरकार पर निशाना साधा है। गहलोत ने आरोप लगाया कि सरकार जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों पर दबाव बना रही है और अधिकारियों को मुख्यमंत्री कार्यालय बुलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों पर इस तरह का दबाव चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है।

निकाय चुनाव को लेकर सरकार पर सवाल

गहलोत ने स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि सरकार चुनाव कराने को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव समय पर कराना लोकतांत्रिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है तथा इसमें अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

यह बयान ऐसे समय आया है जब राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियां तेज हो गई हैं और वार्डों के आरक्षण की लॉटरी की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। 17 अगस्त को जिला मुख्यालयों पर वार्ड आरक्षण की लॉटरी की प्रक्रिया प्रस्तावित है, जिसमें राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है।

अधिकारियों को CMO बुलाने का आरोप

गहलोत ने दावा किया कि जिला स्तर के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को मुख्यमंत्री कार्यालय बुलाया जा रहा है। उन्होंने इसे लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए और कहा कि अधिकारियों को राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर काम करने का अवसर मिलना चाहिए।

हालांकि, गहलोत द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर सरकार की ओर से तत्काल कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए आरोपों को फिलहाल कांग्रेस नेता का राजनीतिक दावा माना जा रहा है।

प्रशासनिक फेरबदल भी चर्चा में

निकाय चुनावों से पहले राजस्थान सरकार की ओर से प्रशासनिक स्तर पर भी बड़े बदलाव किए गए हैं। हाल ही में कई RAS अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। यह फेरबदल चुनावी तैयारियों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

बिजली-पानी जैसे मुद्दों पर भी घेरा

गहलोत ने सरकार पर केवल चुनावी मुद्दे को लेकर ही हमला नहीं किया, बल्कि बिजली, पानी और आम जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों को लेकर भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को जनता की समस्याओं पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि प्रशासन को जनता की समस्याओं के समाधान पर प्राथमिकता से काम करना चाहिए।

चुनावी माहौल में बढ़ी सियासी गर्मी

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच गहलोत के ताजा बयान से प्रदेश की सियासत गरमा गई है। एक तरफ सरकार चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आरक्षण और प्रशासनिक तैयारियों में जुटी है, वहीं कांग्रेस सरकार की नीयत और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठा रही है।

अब देखना होगा कि भाजपा सरकार गहलोत के आरोपों पर क्या जवाब देती है और स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है। फिलहाल गहलोत के आरोपों ने राजस्थान में आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

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