नई दिल्ली। ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को लेकर राजनीतिक और संवैधानिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ 22 NDA शासित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विधानसभा चुनाव कराने के विकल्प पर मंथन की खबर सामने आई है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य अलग-अलग समय पर होने वाले चुनावों को एक साथ लाकर देश में चुनावी चक्र को एक निर्धारित समय-सारणी में लाना है।
मौजूदा प्रस्ताव में 2034 का लक्ष्य
‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ से जुड़े मौजूदा विधेयकों के तहत पहले 2034 में लोकसभा और सभी राज्यों के विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की व्यवस्था का खाका सामने आया था। लेकिन अब NDA के स्तर पर इसे 2029 से शुरू करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। संसद की संयुक्त समिति इस मुद्दे पर विभिन्न राज्यों की सरकारों और अन्य हितधारकों से चर्चा कर रही है।
22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एक साथ लाने की कवायद
रिपोर्ट के अनुसार, NDA के पास वर्तमान में 22 ऐसे राज्य और केंद्रशासित प्रदेश हैं जहां उसका बहुमत है। इनमें से 11 राज्यों में 2027 और 2028 के दौरान विधानसभा चुनाव होने हैं, जबकि कुछ राज्यों में चुनाव 2029 में प्रस्तावित हैं। ऐसे में 2029 में लोकसभा चुनाव के साथ इन राज्यों में चुनाव कराने के लिए विधानसभा के कार्यकाल को सामान्य अवधि से पहले समाप्त करने का विकल्प चर्चा में है।
किन राज्यों में पहले चुनाव होने हैं?
रिपोर्ट के मुताबिक NDA शासित राज्यों में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मेघालय, राजस्थान और त्रिपुरा में 2027-28 के दौरान चुनाव होने हैं। वहीं हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र में 2029 में चुनाव प्रस्तावित हैं। आंध्र प्रदेश, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में विधानसभा चुनाव पहले से ही लोकसभा चुनाव के साथ होते हैं।
विधानसभा भंग करने का विकल्प
2029 में चुनावों को एक साथ कराने के लिए उन राज्यों की विधानसभाओं को उनका पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले भंग करना पड़ सकता है, जहां चुनाव 2027 या 2028 में होने हैं। संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत विधानसभा को भंग करने का प्रावधान है। विधानसभा भंग होने के बाद जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत निर्धारित अवधि में चुनाव कराना होता है।
विपक्षी दलों के लिए भी बड़ा राजनीतिक सवाल
इस प्रस्ताव से विपक्षी दलों के सामने भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो सकते हैं। विपक्ष शासित जिन राज्यों में 2027 या 2028 में चुनाव होने हैं, वहां 2029 में लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव कराने के लिए अलग-अलग संवैधानिक और राजनीतिक व्यवस्थाओं की जरूरत पड़ेगी। यही कारण है कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को लेकर राजनीतिक सहमति बनाना सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
संसद की संयुक्त समिति कर रही है विचार
‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक और केंद्रशासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक पर संसद की संयुक्त समिति विचार कर रही है। समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने कहा है कि 2029 से पहले चुनाव कराने का फैसला समिति के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और इस पर निर्णय NDA के मुख्यमंत्री करेंगे। समिति की ओर से इस वर्ष के शीतकालीन सत्र में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने की उम्मीद है।
क्या है ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’?
‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का मूल विचार लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराने का है। समर्थकों का तर्क है कि बार-बार चुनाव होने से सरकारी मशीनरी और सुरक्षा बल लंबे समय तक चुनावी ड्यूटी में लगे रहते हैं तथा आदर्श आचार संहिता के कारण विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर, विरोध करने वाले दलों का कहना है कि इससे राज्यों के राजनीतिक मुद्दे राष्ट्रीय मुद्दों के सामने कमजोर पड़ सकते हैं और संघीय ढांचे पर असर पड़ सकता है।
फिलहाल 2029 में 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव कराने का विचार एक संभावित राजनीतिक विकल्प है, अंतिम निर्णय नहीं। इसके लिए संवैधानिक प्रावधानों, राजनीतिक सहमति और संबंधित विधानसभाओं के कार्यकाल को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लेने होंगे।





