नई दिल्ली, 23 अगस्त। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने 19 अगस्त को अपने कार्यक्रमों में गीत के केवल पहले दो अंतरे गाने की अपनी पुरानी नीति को दोहराया था। इसके बाद भाजपा ने कांग्रेस के इस फैसले पर कड़ा विरोध जताते हुए राष्ट्रीय गीत के सम्मान और उसकी ऐतिहासिक विरासत को लेकर देशव्यापी अभियान चलाने का ऐलान किया है।
भाजपा ने 22 अगस्त को एक प्रस्ताव पारित कर कांग्रेस के फैसले की आलोचना की। पार्टी का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ का सम्मान किसी राजनीतिक दल तक सीमित विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जुड़ा मामला है। भाजपा ने कहा कि वह गीत की पूरी ऐतिहासिक विरासत को सामने रखने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चलाएगी।
दो अंतरे बनाम पूरा गीत
विवाद का केंद्र यह है कि कांग्रेस अपने कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के पहले दो अंतरे ही गाने की परंपरा को जारी रखना चाहती है, जबकि भाजपा पूरे गीत की ऐतिहासिक विरासत और सम्मान पर जोर दे रही है। कांग्रेस का यह रुख 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा लिए गए उस निर्णय से जुड़ा है, जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर गीत के पहले दो अंतरों के इस्तेमाल की बात कही गई थी।
भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस का मौजूदा फैसला राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान को सीमित करता है। पार्टी ने इसे राजनीतिक तुष्टीकरण से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है। वहीं कांग्रेस और विपक्षी नेताओं का तर्क है कि भाजपा को राष्ट्रीय गीत के बजाय जनता से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
पुराना इतिहास फिर बना राजनीतिक मुद्दा
‘वंदे मातरम्’ का इतिहास भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा रहा है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण प्रतीक बना। हालांकि, समय के साथ गीत के कुछ हिस्सों और धार्मिक संदर्भों को लेकर राजनीतिक एवं सामाजिक बहस भी होती रही है। यही वजह है कि आजादी के बाद भी इसके सार्वजनिक इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दृष्टिकोण सामने आते रहे हैं।
भाजपा का देशव्यापी अभियान
भाजपा ने अब इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी का प्रस्ताव ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान, गरिमा और ऐतिहासिक महत्व को प्रमुखता देता है। भाजपा नेताओं का कहना है कि अभियान के जरिए लोगों को गीत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े इतिहास और उसके राष्ट्रीय महत्व के बारे में बताया जाएगा।
वहीं विपक्ष का कहना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान सभी के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इन्हें राजनीतिक संघर्ष का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। इस तरह ‘वंदे मातरम्’ अब केवल सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विषय नहीं रहकर भाजपा और कांग्रेस के बीच वैचारिक और राजनीतिक टकराव का नया केंद्र बन गया है।
आने वाले दिनों में भाजपा के प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी अभियान और विपक्ष की प्रतिक्रिया के साथ यह विवाद और तेज होने के आसार हैं।





