चंडीगढ़। पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ने की रणनीति का संकेत दिया है। वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और कांग्रेस के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। तीनों दलों की सक्रियता से राज्य में चुनावी माहौल अभी से गरमाने लगा है।
BJP के पंजाब अध्यक्ष सुनील जाखड़ सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की ओर से कई बार संकेत दिए गए हैं कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में अपने संगठन और कार्यकर्ताओं के दम पर मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति से शिरोमणि अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन को लेकर भी अटकलें तेज हुई हैं। BJP और अकाली दल लंबे समय तक पंजाब में गठबंधन के सहयोगी रहे हैं, लेकिन दोनों दलों के बीच पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक दूरी बढ़ी है।
BJP अब पंजाब में अपने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में अपना जनाधार बढ़ाने पर जोर दे रही है। पार्टी का प्रयास है कि विधानसभा चुनाव में वह किसी दूसरे दल के सहारे के बजाय अपने संगठन और उम्मीदवारों के आधार पर चुनावी मुकाबला करे।
उधर, सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी भी चुनावी तैयारियों को लेकर सक्रिय है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार अपनी योजनाओं और विकास कार्यों को जनता के बीच पहुंचाने में जुटी है। दूसरी ओर विपक्षी दल सरकार पर कानून-व्यवस्था, नशे की समस्या, रोजगार और प्रशासनिक कामकाज को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग लगातार मुख्यमंत्री भगवंत मान और AAP सरकार पर निशाना साध रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार जनता से किए गए कई वादों को पूरा करने में विफल रही है। कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के लिए बूथ स्तर पर भी गतिविधियां बढ़ा रही है।
कांग्रेस और AAP के बीच पंजाब में राजनीतिक मुकाबला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों दल राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी राजनीति में कई मुद्दों पर साथ दिखाई देते हैं, लेकिन पंजाब में दोनों के बीच सीधा राजनीतिक संघर्ष है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
राज्य में BJP की बढ़ती सक्रियता ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। यदि BJP सभी 117 सीटों पर अकेले मैदान में उतरती है, तो चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति मजबूत हो सकती है। वहीं शिरोमणि अकाली दल और अन्य दलों की रणनीति भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
फिलहाल पंजाब की राजनीति में AAP सरकार के कामकाज, कांग्रेस की वापसी की कोशिश और BJP के विस्तार पर सबसे ज्यादा नजर है। आने वाले दिनों में तीनों दलों के कार्यक्रम, रैलियां और नेताओं के बयान 2027 के विधानसभा चुनाव की दिशा और राजनीतिक समीकरणों की तस्वीर को और स्पष्ट कर सकते हैं।





