नई दिल्ली, 13 अगस्त। संसद के मानसून सत्र के अंतिम चरण में NEET पेपर लीक और छात्र आंदोलन का मुद्दा एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव का केंद्र बन गया है। सरकार की ओर से छात्र आंदोलन और NEET से जुड़े मुद्दों पर सदन में चर्चा कराने की पेशकश की गई है, लेकिन विपक्ष चर्चा के तरीके और सरकार की जवाबदेही को लेकर अपनी मांगों पर कायम है। इसके चलते संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने को लेकर गतिरोध बना हुआ है।
सरकार ने चर्चा का दिया प्रस्ताव
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष को NEET से जुड़े छात्र आंदोलन पर चर्चा के लिए तैयार रहने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है। शाह ने संसद में पर्याप्त समय देकर मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराने की पेशकश की है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी सरकार की ओर से चर्चा के लिए तैयार होने की बात दोहराई। उन्होंने विपक्ष पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार NEET पेपर लीक तथा छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सदन में जवाब देने के लिए तैयार है।
विपक्ष की अलग मांगें
विपक्ष का कहना है कि केवल चर्चा की पेशकश पर्याप्त नहीं है। विपक्षी दल NEET विवाद, छात्रों के आंदोलन और प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांग रहे हैं। इससे पहले विपक्ष ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई थी और चर्चा के लिए विशेष संसदीय नियमों के तहत समय देने पर जोर दिया था।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का तर्क है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए और सरकार को परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं तथा छात्रों के आंदोलनों से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए।
कई दिनों से जारी है राजनीतिक टकराव
मानसून सत्र की शुरुआत से ही NEET पेपर लीक का मुद्दा संसद में प्रमुख विपक्षी मुद्दों में रहा है। विपक्षी सांसदों के विरोध और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। विपक्ष ने NEET मामले के साथ-साथ छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया है।
सरकार का कहना है कि वह छात्रों से जुड़े विषय पर चर्चा के लिए तैयार है और सदन में तथ्यात्मक जवाब देना चाहती है। वहीं विपक्ष का कहना है कि चर्चा के साथ सरकार की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। यही मतभेद संसद में गतिरोध का प्रमुख कारण बना हुआ है।
अंतिम दिन हंगामा बढ़ने की आशंका
मानसून सत्र के अंतिम दिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनने पर संसद की कार्यवाही में एक बार फिर हंगामे की आशंका है। सरकार की कोशिश है कि लंबित विधायी कामकाज को आगे बढ़ाया जाए, जबकि विपक्ष NEET और छात्र आंदोलन सहित अपने मुद्दों को प्रमुखता से उठाने पर जोर दे रहा है। सत्र के दौरान लगातार व्यवधान के कारण कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य प्रभावित हुए हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि अंतिम दिन सरकार और विपक्ष के बीच कोई सहमति बनती है या संसद का सत्र भी राजनीतिक गतिरोध के बीच समाप्त होता है। NEET और छात्र आंदोलन का मुद्दा फिलहाल संसद के साथ-साथ देश की राजनीति में भी प्रमुख बहस का विषय बना हुआ है।





