नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र का चौथा दिन गुरुवार को भी भारी हंगामे के बीच बिना किसी ठोस विधायी कार्यवाही के समाप्त हो गया। लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के चलते कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा कविता पढ़कर विरोध दर्ज कराने पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी आपत्ति जताई।
राज्यसभा में कविता पढ़कर जताया विरोध शाम करीब तीन बजे जब राज्यसभा की कार्यवाही चौथी बार शुरू हुई तो उपसभापति हरिवंश ने नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को बोलने का अवसर दिया। खड़गे अपने हाथ में एक पन्ना लेकर खड़े हुए और कविता के माध्यम से सरकार पर निशाना साधते हुए कहा— "सच को जिंदा रखने के लिए मर जाएंगे, ये दिल, ये जान सब कुर्बान कर जाएंगे, मगर देश से अन्याय मिटाने के लिए हर चुनौती से टकरा जाएंगे..."
खड़गे अभी अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाए थे कि उपसभापति ने उन्हें रोकते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को बोलने का अवसर दिया। रिजिजू ने जताई आपत्ति रिजिजू ने खड़गे के कविता पढ़ने के तरीके पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सदन में औपचारिक चर्चा शुरू करने की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन विपक्ष इसे विरोध प्रदर्शन का मंच बना रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह सदन की कार्यवाही नहीं चल सकती और नियमों का पालन आवश्यक है।
इस पर उपसभापति हरिवंश ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने के उद्देश्य से ही खड़गे से प्रस्ताव पर बोलने का आग्रह किया था। लगातार जारी हंगामे और नारेबाजी के बीच अंततः राज्यसभा की कार्यवाही शुक्रवार, 24 जुलाई को सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष का हंगामा राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की। हंगामे के कारण सदन में कोई सार्थक चर्चा नहीं हो सकी।
लोकसभा भी नहीं चल सकी लोकसभा में भी दिनभर लगभग यही स्थिति बनी रही। कार्यवाही शुरू होते ही स्पीकर ओम बिरला ने स्पष्ट कहा कि प्रश्नकाल के दौरान केवल प्रश्नकाल ही चलेगा, लेकिन विपक्षी सदस्य वेल में पहुंचकर नारेबाजी करते रहे। इसके चलते सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। दोपहर 12 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी विपक्ष का विरोध जारी रहा।
हंगामे के बीच सूचीबद्ध सरकारी कार्य निपटाए गए और सदन को दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इसके बाद दोपहर दो बजे डिप्टी स्पीकर पैनल के सदस्य दिलीप सैकिया ने नियम 377 के तहत चर्चा शुरू कराने का प्रयास किया, लेकिन लगातार हंगामे के कारण कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। चेयर की बार-बार की अपील के बावजूद विपक्षी सदस्य वेल से नहीं हटे। अंततः लोकसभा की कार्यवाही भी पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। चौथे दिन भी नहीं हो सका सामान्य कामकाज लगातार चौथे दिन संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के विरोध और सत्ता पक्ष के साथ तीखी नोकझोंक के कारण सामान्य कामकाज प्रभावित रहा। सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध कायम रहने से विधायी कार्यों पर भी असर पड़ा।





