नई दिल्ली: संसद के मॉनसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की बैठने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अध्यक्ष ने कुल 39 सांसदों की सीटों में परिवर्तन को मंजूरी दी है। इस बदलाव के तहत तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसदों को पार्टी के अन्य सांसदों से अलग बैठाने का फैसला किया गया है। माना जा रहा है कि यह कदम सदन में संसदीय व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और दलगत स्थिति को स्पष्ट करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी नई सीट व्यवस्था के अनुसार, टीएमसी से अलग रुख अपनाने वाले सांसद अब पार्टी के अधिकृत सांसदों के साथ नहीं बैठेंगे। उनकी सीटें सदन के अलग हिस्से में निर्धारित की गई हैं। यह निर्णय संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले लिया गया है, जिससे राजनीतिक हलकों में इसकी व्यापक चर्चा हो रही है।
कई दलों के सांसदों की बदली गई सीटें-सूत्रों के अनुसार, केवल टीएमसी ही नहीं बल्कि विभिन्न राजनीतिक दलों के कुल 39 सांसदों की सीटों में बदलाव किया गया है। यह बदलाव सांसदों की संख्या, दलगत स्थिति, गठबंधन में हुए परिवर्तन और अन्य प्रशासनिक कारणों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। लोकसभा सचिवालय समय-समय पर ऐसी पुनर्व्यवस्था करता है ताकि सदन की कार्यवाही व्यवस्थित ढंग से संचालित हो सके।
टीएमसी के भीतर बढ़ी राजनीतिक हलचल-टीएमसी के बागी सांसदों को अलग सीट मिलने के बाद पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इस फैसले को संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं, जबकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे सदन में टीएमसी के भीतर मौजूद मतभेद और अधिक स्पष्ट दिखाई देंगे।
मॉनसून सत्र में रहेंगे कई अहम मुद्दे-20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र में केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक और नीतिगत प्रस्ताव पेश कर सकती है। वहीं विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, किसानों के मुद्दे, कानून-व्यवस्था और विभिन्न राज्यों से जुड़े विषयों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में लोकसभा की नई सीट व्यवस्था भी इस बार के सत्र की प्रमुख चर्चाओं में शामिल हो गई है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का यह निर्णय संसदीय परंपराओं और नियमों के अनुरूप माना जा रहा है। अब सभी सांसद नई सीट व्यवस्था के अनुसार सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे।





