नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में विभिन्न वामपंथी छात्र और सांस्कृतिक संगठनों की सक्रियता ने विश्वविद्यालय परिसरों में नई राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। वांगचुक के समर्थन में आयोजित प्रदर्शनों और अभियानों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले), छात्र संगठन आइसा (AISA) तथा सांस्कृतिक संगठन इफ्टा (IPTA) से जुड़े कार्यकर्ताओं की भागीदारी देखने को मिली।
इन संगठनों ने दिल्ली समेत कई विश्वविद्यालय परिसरों में विरोध प्रदर्शन, जनसभाएं और हस्ताक्षर अभियान आयोजित किए। प्रदर्शनकारियों ने वांगचुक की मांगों पर सरकार से संवाद करने और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार का सम्मान करने की अपील की।
छात्र राजनीति से जुड़े जानकारों का कहना है कि इस मुद्दे पर वामपंथी छात्र संगठनों ने कैंपस में अपनी सक्रिय मौजूदगी दर्ज कराई है। कई स्थानों पर छात्रों ने इन अभियानों में भाग लिया, जबकि अन्य छात्र संगठनों ने भी अलग-अलग स्तर पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद विश्वविद्यालय परिसरों में छात्र राजनीति एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मुद्दे का छात्र संगठनों की सक्रियता और कैंपस राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।





