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सीजेपी ने सरकार से मांगा लिखित समझौता, नहीं मिला तो आंदोलन दोबारा शुरू करने की चेतावनी

संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मंगलवार तक लिखित समझौता जारी नहीं किया गया और विभिन्न राज्यों में हिरासत में लिए गए छात्रों एवं प्रदर्शनकारियों को रिहा नहीं किया गया, तो आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा।

NSI Admin27 Jul 2026, 05:01 PM3 min read
सीजेपी ने सरकार से मांगा लिखित समझौता, नहीं मिला तो आंदोलन दोबारा शुरू करने की चेतावनी

कपिल सिब्बल ने ₹1 करोड़ की सहायता राशि देने की घोषणा

नई दिल्ली। जंतर-मंतर आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच हुए कथित समझौते पर अब नया विवाद खड़ा हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार से समझौते की लिखित प्रति सार्वजनिक करने की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मंगलवार तक लिखित समझौता जारी नहीं किया गया और विभिन्न राज्यों में हिरासत में लिए गए छात्रों एवं प्रदर्शनकारियों को रिहा नहीं किया गया, तो आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा।

सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया कि 25 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ हुई तीसरे दौर की वार्ता में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी थी। उनके अनुसार बैठक में यह तय हुआ था कि जंतर-मंतर आंदोलन, 20 जुलाई के प्रदर्शन और देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े सभी एफआईआर वापस लिए जाएंगे।

रांका ने दावा किया कि बातचीत के दौरान यह भी आश्वासन दिया गया था कि भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी, छात्र या आंदोलन के आयोजक के खिलाफ नए मुकदमे दर्ज नहीं किए जाएंगे और उन्हें किसी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।

'सरकार लिखित मसौदा जारी करे'

सीजेपी का कहना है कि संगठन की ओर से समझौते का लिखित मसौदा पहले ही सरकार को सौंप दिया गया था। अब सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपना अधिकृत मसौदा जारी करे, ताकि दोनों पक्षों के वकील उसकी समीक्षा कर अंतिम दस्तावेज तैयार कर सकें।

प्रवक्ता ने कहा कि केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में हुई सहमति का सम्मान होना चाहिए और जब तक अंतिम लिखित समझौता लागू नहीं हो जाता, तब तक किसी भी प्रदर्शनकारी को हिरासत में लेने, गिरफ्तार करने या परेशान करने जैसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

फिर आंदोलन की चेतावनी

सीजेपी ने स्पष्ट किया कि यदि मंगलवार तक लिखित समझौता साझा नहीं किया गया और विभिन्न राज्यों में गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए छात्रों, युवाओं तथा प्रदर्शनकारियों को रिहा नहीं किया गया, तो संगठन दोबारा देशव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा।

कपिल सिब्बल ने कानूनी मदद का दिया भरोसा

इस बीच वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने आंदोलन से जुड़े छात्रों और युवाओं को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों में कानूनी रणनीति तैयार की जाएगी ताकि उन्हें न्याय मिल सके।सिब्बल ने यह भी घोषणा की कि आंदोलन के दौरान जिन छात्रों और युवाओं को आर्थिक या कानूनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, उनके सहयोग के लिए ₹1 करोड़ की सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और छात्रों के हितों की सुरक्षा के लिए हरसंभव सहयोग दिया जाएगा।

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