महिला आरक्षण पर फिर आमने-सामने राहुल और रिजिजू, केंद्रीय मंत्री ने कानून की धाराओं से दिया जवाब

राहुल गांधी लगातार सरकार से महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि संसद ने 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पारित कर दिया था, ऐसे में महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने में और देरी नहीं होनी चाहिए।

NSI Admin08 Aug 2026, 04:53 PM3 min read
महिला आरक्षण पर फिर आमने-सामने राहुल और रिजिजू, केंद्रीय मंत्री ने कानून की धाराओं से दिया जवाब

नई दिल्ली। महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बीच सियासी तकरार एक बार फिर तेज हो गई है। राहुल गांधी के सवालों के बाद रिजिजू ने सोशल मीडिया के जरिए महिला आरक्षण कानून के संवैधानिक प्रावधानों और इसे लागू करने की प्रक्रिया का हवाला देते हुए जवाब दिया है।

राहुल गांधी लगातार सरकार से महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि संसद ने 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पारित कर दिया था, ऐसे में महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने में और देरी नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर इसके कार्यान्वयन को टाल रही है।

वहीं, रिजिजू ने राहुल गांधी के आरोपों पर जवाब देते हुए कानून में मौजूद प्रावधानों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि संविधान के 106वें संशोधन के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, इसके प्रभावी होने के लिए संविधान में परिसीमन और जनगणना से जुड़ी प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

केंद्रीय मंत्री का कहना है कि महिला आरक्षण को लागू करने के लिए पहले संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। रिजिजू ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसी प्रक्रिया और कानून में मौजूद प्रावधानों को सामने रखते हुए राहुल गांधी के सवालों का जवाब दिया।

परिसीमन पर फंसा है मामला

महिला आरक्षण कानून का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका परिसीमन से जुड़ा होना है। कानून के तहत आरक्षण की व्यवस्था परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू होनी है। इसी मुद्दे को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद बना हुआ है।

राहुल गांधी का तर्क है कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए लंबा इंतजार नहीं कराया जाना चाहिए। कांग्रेस चाहती है कि मौजूदा लोकसभा की सीटों के आधार पर ही महिला आरक्षण को लागू किया जाए।

दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि कानून में जिस संवैधानिक प्रक्रिया का उल्लेख है, उसे नजरअंदाज करके आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता। यही मुद्दा अब राहुल गांधी और रिजिजू के बीच राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

2029 के चुनाव से पहले लागू करने की चर्चा

महिला आरक्षण कानून को आगामी लोकसभा चुनावों से पहले लागू करने को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। सरकार की ओर से परिसीमन और इससे जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों से बातचीत भी की जा रही है।

ऐसे में राहुल गांधी और किरेन रिजिजू के बीच सोशल मीडिया पर शुरू हुई यह बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच मुख्य मतभेद इस बात को लेकर है कि महिला आरक्षण कब और किस प्रक्रिया के तहत लागू किया जाए।

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