नई दिल्ली,नेशनल डेस्क। बांग्लादेश में प्रस्तावित तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट (TRCMRP) को लेकर भारत की चिंता बढ़ गई है। बांग्लादेश और चीन के बीच इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर सहयोग तेज होने के बाद भारत ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अपनी रणनीति में बदलाव भी कर सकता है।
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि बांग्लादेश में भारत की विकास सहायता दोनों देशों के बीच तय आपसी रोडमैप के आधार पर चलती है, जिसकी समय-समय पर समीक्षा की जाती है। उन्होंने कहा कि तीस्ता परियोजना से जुड़े सभी घटनाक्रमों को भारत अपने समग्र दृष्टिकोण में शामिल करेगा।

क्या है तीस्ता प्रोजेक्ट-तीस्ता नदी सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है। बांग्लादेश लंबे समय से नदी के पुनर्विकास, जल संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े प्रोजेक्ट पर काम करना चाहता है। हाल के दिनों में ढाका और बीजिंग के बीच इस परियोजना को लेकर सहयोग बढ़ा है और चीन ने तकनीकी सहायता तथा समर्थन देने पर सहमति जताई है।
भारत की चिंता क्यों बढ़ी?
भारत के लिए यह मामला केवल जल प्रबंधन तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित परियोजना भारत-बांग्लादेश सीमा और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर के निकट स्थित है। ऐसे में चीन की बढ़ती मौजूदगी को भारत सुरक्षा और भू-राजनीतिक नजरिए से भी देख रहा है।
बांग्लादेश ने क्या कहा -बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने हाल ही में कहा कि तीस्ता परियोजना उनके देश की राष्ट्रीय प्राथमिकता है और इसे "हर हाल में लागू किया जाएगा।" चीन यात्रा के दौरान दोनों देशों ने तीस्ता समेत अन्य नदी प्रबंधन परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई थी।
आगे क्या-भारत ने फिलहाल किसी टकराव की स्थिति से इनकार किया है, लेकिन यह साफ कर दिया है कि तीस्ता परियोजना से जुड़े हर नए घटनाक्रम पर उसकी नजर रहेगी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यदि परिस्थितियां बदलती हैं तो भारत अपने समग्र दृष्टिकोण और विकास सहयोग की नीति में आवश्यक बदलाव करने से भी पीछे नहीं हटेगा।



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