जयपुर, 05 जुलाई। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने शेयर बाजार में निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर देशव्यापी ठगी करने वाले एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस टीम ने इस 500 करोड़ रुपये के मेगा साइबर घोटाले के मुख्य मास्टरमाइंड को महाराष्ट्र के पुणे शहर से गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी लोन देने के बहाने फर्जी कंपनियां बनाकर लोगों के दस्तावेज हड़पता था और फिर उनके नाम पर म्युल बैंक खाते खुलवाकर ठगी की रकम को ठिकाने लगाता था।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री विजय कुमार सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन पर परिवादी सेंधाराम चौधरी ने 16 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी की एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित ने बताया था कि उसे 105 IND STOCKS ADV नाम के एक ऑनलाइन व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया था, जहां निवेश और ट्रेडिंग के माध्यम से अत्यधिक मुनाफा कमाने का लालच और झूठा आश्वासन देकर उसके साथ ठगी की गई। जब पुलिस की तकनीकी टीम ने उक्त व्हाट्सएप ग्रुप की चैट और डेटा का गहन विश्लेषण किया, तो खुलासा हुआ कि इस अकेले ग्रुप के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों से करीब 500 करोड़ रुपये की भारी-भरकम साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा चुका है।
ऐसे देते है करोड़ों की ठगी को अंजाम —
इस शातिर गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद योजनाबद्ध थी। साइबर अपराधी सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से आम लोगों को घर बैठे ट्रेडिंग से मोटा मुनाफा कमाने के मैसेज भेजते थे। शुरुआत में पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए वे निवेश के बदले मुनाफे की कुछ छोटी रकम पीड़ित के बैंक खाते में ट्रांसफर भी करते थे। जब पीड़ित को पुलिस और सिस्टम पर पूरा भरोसा हो जाता था, तो वह लालच में आकर अपनी जमा-पूंजी और मोटी रकम का निवेश कर देता था। जैसे ही बड़ा फंड अपराधियों के फर्जी खातों में ट्रांसफर होता, साइबर ठग पीड़ित को व्हाट्सएप ग्रुप से रिमूव कर देते थे और ग्रुप को डिलीट कर गायब हो जाते थे।
इस संवेदनशील और बड़े मामले की गंभीरता को देखते हुए उप महानिरीक्षक पुलिस साइबर क्राइम श्री शांतनु कुमार सिंह के निर्देशन तथा साइबर क्राइम पुलिस अधीक्षक श्री सुमित मेहरड़ा के सुपरविजन में स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, जयपुर की एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए गए दर्जनों बैंक खातों, व्हाट्सएप ग्रुप के डेटा और मोबाइल नंबरों का गहन तकनीकी विश्लेषण किया। इसके बाद टीम ने जाल बिछाकर इस पूरे सिंडिकेट के मास्टरमाइंड युवराज सतीश मुदलियार (35) निवासी लोहगांव पुणे सिटी (महाराष्ट्र) को पुणे से गिरफ्तार कर लिया, जिसे ट्रांजिट वारंट पर जयपुर लाया गया है।
फर्जी फाइनेंस कंपनियों की आड़ में जुटाता था म्यूल बैंक खाते, हवाला और क्रिप्टो के जरिए खपाता था ठगी का पैसा —
गिरफ्तार मुख्य आरोपी युवराज सतीश ने पुलिस पूछताछ में अपने पूरे नेटवर्क का सनसनीखेज खुलासा किया है। उसने बताया कि वह पुणे में ग्रेस फाइनेंस, पॉजिटिव बैलेंस और गुरु फाइनेंस नाम से लोन देने वाली फर्जी कंपनियां चलाता था। लोन पास कराने के नाम पर वह सीधे-साधे लोगों से उनके पैन कार्ड, पहचान पत्र, बैंक स्टेटमेंट और सैलरी स्लिप जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज प्राप्त कर लेता था। बाद में इन्हीं दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर वह उनके नाम पर म्युल बैंक खाते खुलवाता और खाताधारकों को इसके बदले 10 हजार रुपये का कमीशन देता था। इन खातों में आने वाली ठगी की करोड़ों की रकम को वह एटीएम से निकालता और हवाला नेटवर्क के जरिए अपने बिनांस वॉलेट (Binance Wallet) में क्रिप्टो करेंसी (USDT) खरीदकर विदेशों में बेच देता था, जिसके बदले उसे सीधा 5 प्रतिशत कमीशन मिलता था।





