मनमाने और सनक भरे रास्ते से सत्ता पाने की कोशिश का वही हश्र होगा जो शिवसेना का हुआ

देश में यदि ममता बनर्जी के बाद किसी ने संविधान और कानून कायदों को ठेंगा दिया है तो वह है शिवसेना। शिवसेना ने भी ममता की तरह अपने ही कायदे कानून चलाने में कसर बाकी नहीं रखी। शिवसेना का ख्याल आते ही, देश के आम जनमानस में महाराष्ट में शिवसैनिकों की छवि उभरती थी, हाथों में डंडे या हथियार लिए शिवसैनिक ..

NSI Admin03 Jul 2026, 01:17 AM36 views5 min read
मनमाने और सनक भरे रास्ते से सत्ता पाने की कोशिश का वही हश्र होगा जो शिवसेना का हुआ
The Shiv Sena, a party that thrived on the politics of fear and terror, has been brought to its knees

र और आतंक की राजनीति करने वाली शिवसेना घुटने पर आ चुकी है। नौबत यह आ गई है कि महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार की मोदी सरकार को अपनी शर्तों पर नचाने का सपना देखने वाले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का ठिकाना छिन गया है। खुद सेना के सांसदों ने ही यह कारनामा कर दिखाया है। पार्टी के पूरी तरह से छिन्न भिन्न होने से लाचार उद्धव ने अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकस कर डाली। शिवसेना (यूबीटी) गुट के 6 सांसदों ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में शिवसेना का दामन थाम लिया।

शिवसेना यूबीटी की संख्या 9 से घटकर 3 रह गई है, जबकि शिंदे गुट की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो गई है। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी, जिस महाराष्ट्र में एक दौर में एकीकृत शिवसेना की तूती बोलती थी, वहां उसकी बोलती भी लगभग बंद हो जाएगी। इस हालत के लिए शिवसेना खुद जिम्मेदार है। कायदे—कानून भूल कर हर हालत में सिर्फ ताकत के बलबूते सत्ता पाने का ख्वाब देखने वाली शिवसेना यह भूल गई कि संविधान से इतर जाकर गैर लोकतांत्रिक तौर—तरीकों से सत्ता नहीं मिल सकती।

देश के अन्य क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की तरह सिकुडती शिवसेना का इतिहास कुछ ज्यादा ही काला रहा है। देश में यदि ममता बनर्जी के बाद किसी ने संविधान और कानून कायदों को ठेंगा दिया है तो वह है शिवसेना। शिवसेना ने भी ममता की तरह अपने ही कायदे कानून चलाने में कसर बाकी नहीं रखी। शिवसेना का ख्याल आते ही, देश के आम जनमानस में महाराष्ट में शिवसैनिकों की छवि उभरती थी, हाथों में डंडे या हथियार लिए शिवसैनिक और माथे पर शिवसेना का कपड़ा लपेटे हुए।

शिवसेना के संस्थापक बाला साहब ठाकरे के दौरान बनी छवि से यह जाहिर होता था कि किसी को कानून की परवाह नहीं है। कानून वही है जो शिवसेना बोल दे। किसी ने जरा भी विरोध करने का दुस्साहस किया तो उसकी खैर नहीं। महाराष्ट्र में चाहे सरकार किसी भी राजनीतिक दल की हो, शिवसेना का आतंक इतना जबरदस्त था कि किसी हिम्मत नहीं थी कि उनकी मनमानी के खिलाफ आवाज उठा सके। बाल ठाकरे ने बाहर से आकर मुंबई बसने वाले लोगों पर कटाक्ष करते हुए महाराष्ट्र को सिर्फ मराठियों का कहकर संबोधित किया।

खासतौर पर दक्षिण भारतीय लोगों के विरोध में उन्होंने कई भद्दे नारे भी दिए। शिवसेना का मुखपत्र माने जाने वाले 'सामना' समाचार पत्र में बिहार और उत्तर प्रदेश से मुंबई पलायन करने वाले लोगों को मराठियों के लिए खतरा बता, बाल ठाकरे ने महाराष्ट्र के लोगों को उनके साथ सहयोग ना करने की सलाह दी। साथ ही इन दो राज्यों से मुंबई बसने वाले नेताओं और अभिनेताओं की भी बाल ठाकरे द्वारा आलोचना की गई।

मोहम्मद अफजल की फांसी की सजा पर कोई फैसला ना सुनाने के लिए बाल ठाकरे ने तत्कालीन राष्ट्रपति ए.पी.जे. अबुल कलाम पर भी अभद्र टिप्पणियां की थी। वैलेंटाइन डे को हिंदू धर्म और संस्कृति के लिए खतरा बता, दुकानों और होटलों में तोड़-फोड करने के अलावा प्रेमी युगलों पर हमला, उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करने के लिए जनता में बाल ठाकरे के खिलाफ रोष उत्पन्न हो गया।

सचिन तेंदुलकर द्वारा भारत की तेजी से विकसित हो रही वाणिज्यिक राजधानी मुंबई को सभी भारतीयों का शहर बताने पर बाल ठाकरे भड़क उठे और उन्होंने सांप्रदायिक आधार पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि तेंदुलकर "मराठी मानसिकता को ठेस पहुंचा रहे हैं। ठाकरे और तेंदुलकर, जो मूल रूप से मराठी थे, के बीच हुई इस तीखी बहस ने राष्ट्रीय स्तर पर काफी सुर्खियां बटोरीं।

शिवसेना का ताज नहीं मिलने पर अलग हुए भतीजे राज ठाकरे ने भी बाल ठाकरे के नक्शे कदम पर चलने की कोशिश की, किन्तु दाल नहीं गली। संसद सदस्य जया बच्चन भी अपनी कथित "मराठी-विरोधी" टिप्पणियों के कारण राष्ट्रीय विवाद में फंस गईं। एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने महाराष्ट्र राज्य और वहां के लोगों का राष्ट्रीय भाषा की आड़ में अपमान करने के लिए जया बच्चन से सार्वजनिक माफी मांगने का आह्वान किया। डर के मारे बच्चन और उनके पति, अभिनेता अमिताभ बच्चन ने सार्वजनिक माफी जारी करते हुए कहा कि वे हिंदी में इसलिए बोले क्योंकि वे उत्तर प्रदेश (उत्तर भारत) से आए थे।

मुंबई या महाराष्ट्र में जिसे रहना है और कारोबार चलाना है, उसे शिवसेना की सारी शर्तों पूरी करनी होती थी। शिवसेना के आगे सिर झुकाने वालों, बॉलीवुड के फिल्मी सितारे, उद्योगपति, क्रिकेटर सहित तमाम दिग्गज हस्तियां शामिल थी। मीडिया भी शिवसेना के बारे में खबर छापने या टीवी पर दिखाने से पहले कई बार सोचता था। यह सब शिवसैनिकों का खौफ था। देश के दूसरे किसी राज्य में ऐसा तांडव किसी राजनीतिक दल का कभी देखने को नहीं मिला, जैसा शिवसेना ने महाराष्ट्र में दिखाया था।

कई दशकों तक शिवसेना की दहशत की यह छाप बनी रही। बाला साहेब के बाद उनके बेटे उद्धव ठाकरे और गद्दी नहीं मिलने के कारण शिवसेना छोड़ कर अलग महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) बनाने वाले भतीजे राज ठाकरे ने भी इसी नक्शे कदम पर चलने की कोशिश की। सत्ता नहीं मिलने पर राज ठाकरे की पार्टी मनसे ने मवालियों वाला तरीका अपनाया और इसको नाम दिया मराठी मानुष और मराठी अस्मिता का।

राजनीति चमकाने के लिए मनसे भाषा और संस्कृति को मुद्दा बना कर गैरकाूननी हरकते करने में कसर बाकी नहीं रखी। इसके बावजूद किसी भी तरह के चुनावों में सफलता हासिल नहीं हो सकी। देश के राजनीतिक दलों के लिए शिवसेना और ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस का हश्र सीखने लायक सबक है। राज्य के विकास के बजाए कानून हाथ में लेकर सत्ता कायम करने की चाहत अंतत: क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के लिए घातक साबित होगी।

Daily Briefing

Stay Ahead of Every Story

Breaking news, top stories, and exclusive coverage -- delivered to your inbox every morning.

N
NSI AdminAuthor

Comments

Sign in to join the conversation

Sign In to Comment

More from Politics

View All
संसद में गतिरोध बरकरार, NEET छात्र आंदोलन पर चर्चा को लेकर सरकार-विपक्ष आमने-सामनेBreaking
Politics

संसद में गतिरोध बरकरार, NEET छात्र आंदोलन पर चर्चा को लेकर सरकार-विपक्ष आमने-सामने

NSI Admin·4 days ago·3 min read
पंजाब में तेज हुई सियासी हलचल, BJP के अकेले चुनाव लड़ने के संकेत से बढ़ी कांग्रेस-AAP की चुनौतीBreaking
Politics

पंजाब में तेज हुई सियासी हलचल, BJP के अकेले चुनाव लड़ने के संकेत से बढ़ी कांग्रेस-AAP की चुनौती

NSI Admin·5 days ago·3 min read
दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में  जेल में बंद उमर खालिद की किताब पर चर्चा
Politics

दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में जेल में बंद उमर खालिद की किताब पर चर्चा

NSI Admin·5 days ago·4 min read
झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में NDA सांसदों का लोकसभा परिसर में प्रदर्शनBreaking
Politics

झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में NDA सांसदों का लोकसभा परिसर में प्रदर्शन

NSI Admin·6 days ago·3 min read