नई दिल्ली,नेशनल डेस्क। दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को निशाना बनाने वाले कुछ अपमानजनक कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया, साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में 'पर्सनैलिटी राइट्स' (व्यक्तिगत अधिकारों) का कोई मुद्दा शामिल नहीं है। चड्ढा की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा बताए गए कंटेंट में से केवल कुछ ही अपमानजनक थे। आदेश सुनाते हुए जज ने कहा कि मैंने कुछ कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया है... बाकी कंटेंट अपमानजनक नहीं है। कोर्ट ने यह भी साफ़ किया कि इस मुक़दमे में पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकारों) से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं उठाया गया है, और कोर्ट ने अपना ध्यान सिर्फ़ मानहानि के आरोपों तक ही सीमित रखा।
यह नया आदेश चड्ढा के लिए थोड़ी राहत लेकर आया है। इससे कुछ हफ़्ते पहले, उसी जज ने चड्ढा को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। जज ने कहा था कि राजनीतिक हस्तियों की आलोचना, व्यंग्य और कार्टून पर सिर्फ़ इसलिए रोक नहीं लगाई जा सकती क्योंकि वे पसंद नहीं आते। यह मामला तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पोस्ट में कथित तौर पर चड्ढा के आम आदमी पार्टी से भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की आलोचना की गई। सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर अपनी तस्वीर और व्यक्तित्व के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाने वाली चड्ढा की याचिका पर सुनवाई करते हुए, जस्टिस प्रसाद ने कहा था कि संबंधित पोस्ट राजनीतिक क्षेत्र में लिए गए फैसलों की आलोचना से जुड़े थे।
कोर्ट ने 21 मई को कहा, "मानहानि और आलोचना के बीच एक बारीक रेखा होती है। मेरे मन में पहली बात यही आई कि प्रथम दृष्टया, व्यक्तित्व अधिकारों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।

