राजस्थान में निकाय चुनावों के लिए वार्डों की आरक्षण लॉटरी, 10,245 वार्डों का बदला चुनावी गणित

वार्ड आरक्षण की लॉटरी पूरी होने के बाद अब यह तय हो गया है कि किस वार्ड से किस आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतर सकेगा। आरक्षण की स्थिति बदलने से कई मौजूदा पार्षदों और संभावित दावेदारों के चुनावी समीकरण भी बदल गए हैं।

NSI Admin17 Aug 2026, 01:55 PM3 views4 min read
राजस्थान में निकाय चुनावों के लिए वार्डों की आरक्षण लॉटरी, 10,245 वार्डों का बदला चुनावी गणित
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जयपुर, 17 अगस्त। राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियां अब निर्णायक दौर में पहुंच गई हैं। प्रदेश के 309 नगरीय निकायों के 10,245 वार्डों के आरक्षण की लॉटरी सोमवार को निकाली गई। इसके साथ ही प्रदेशभर में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों की स्थिति साफ होने लगी है।

वार्ड आरक्षण की लॉटरी पूरी होने के बाद अब यह तय हो गया है कि किस वार्ड से किस आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतर सकेगा। आरक्षण की स्थिति बदलने से कई मौजूदा पार्षदों और संभावित दावेदारों के चुनावी समीकरण भी बदल गए हैं। कई वार्डों में लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे नेताओं को अब नए वार्ड की तलाश करनी पड़ सकती है, जबकि नए दावेदारों के लिए भी चुनाव मैदान में उतरने के अवसर खुल गए हैं।

309 निकायों के 10,245 वार्ड

प्रदेश में कुल 309 नगरीय निकायों के वार्डों के लिए आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की गई है। लॉटरी के जरिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग सहित महिला आरक्षण की स्थिति निर्धारित की गई। आरक्षण का निर्धारण निर्धारित रोटेशन व्यवस्था और संबंधित क्षेत्रों की जनसंख्या के आधार पर किया गया है।

राज्य सरकार की प्रक्रिया के अनुसार लॉटरी वर्गवार निकाली जाती है। इसमें पहले अनुसूचित जाति, उसके बाद अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग और अंत में सामान्य वर्ग की प्रक्रिया की जाती है। महिला आरक्षण की श्रेणियों में भी निर्धारित क्रम के अनुसार लॉटरी निकाली जाती है।

जयपुर में सुबह 9.30 बजे लॉटरी

राजधानी जयपुर में वार्ड आरक्षण की लॉटरी कलेक्ट्रेट परिसर में सुबह 9.30 बजे निकाली गई। पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया था।

लॉटरी के परिणाम सामने आते ही स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। संभावित प्रत्याशियों ने अपने-अपने वार्ड की आरक्षण स्थिति की जानकारी जुटानी शुरू कर दी। कई स्थानों पर दावेदारों के समर्थकों ने भी परिणाम के बाद चुनावी रणनीति पर चर्चा शुरू कर दी।

पुराने दावेदारों के समीकरण बदले

आरक्षण की लॉटरी का सबसे बड़ा असर उन पार्षदों और नेताओं पर पड़ा है, जो लंबे समय से किसी खास वार्ड से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। यदि संबंधित वार्ड आरक्षित हो गया है और दावेदार उस श्रेणी में नहीं आता, तो उसे दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने का विकल्प तलाशना होगा।

वहीं जिन वार्डों को सामान्य या संबंधित दावेदार की श्रेणी के लिए खुला रखा गया है, वहां टिकट के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है। भाजपा और कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों में अब संभावित प्रत्याशियों के नामों पर मंथन तेज होगा।

आरक्षण के बाद चुनाव कार्यक्रम पर नजर

वार्डों की आरक्षण लॉटरी के बाद अब सभी की नजर राज्य निर्वाचन आयोग पर है। लॉटरी के परिणाम जारी होने के बाद चुनाव कार्यक्रम घोषित किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। चुनाव कार्यक्रम जारी होते ही संबंधित क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी।

राज्य में नगरीय निकाय चुनाव पहले चरण में और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव दूसरे चरण में कराए जाने की तैयारी है। पंचायती राज संस्थाओं के आरक्षण की लॉटरी को सितंबर तक टाल दिया गया है। जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और प्रधान पदों के लिए लॉटरी 17 सितंबर, जबकि सरपंच और वार्ड पंचों के लिए 18 सितंबर 2026 को होगी।

पंचायत चुनाव की लॉटरी फिलहाल स्थगित

नगरीय निकायों की वार्ड आरक्षण लॉटरी के बीच पंचायती राज चुनाव को लेकर भी बड़ा बदलाव हुआ है। पहले 17 और 18 अगस्त को होने वाली पंचायत चुनावों की आरक्षण लॉटरी को स्थगित कर दिया गया है। अब यह प्रक्रिया सितंबर में होगी।

सरकार ने चुनाव प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा में पूरा कराने के लिए नया कार्यक्रम जारी किया है। इससे साफ है कि फिलहाल सरकार का फोकस पहले नगरीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर है।

चुनावी सरगर्मी बढ़ी-

वार्डों की आरक्षण लॉटरी के साथ ही राजस्थान के शहरी क्षेत्रों में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। संभावित प्रत्याशी अब अपने वार्ड की आरक्षण स्थिति के अनुसार रणनीति बनाएंगे। राजनीतिक दल भी स्थानीय स्तर पर मजबूत उम्मीदवारों की तलाश और टिकट वितरण को लेकर सक्रिय होंगे।

लॉटरी ने कई वार्डों में पुराने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। अब आने वाले दिनों में टिकट के दावेदारों की सक्रियता, दलों की रणनीति और संभावित प्रत्याशियों की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है। नगरीय निकाय चुनावों की घोषणा के साथ ही राजस्थान में स्थानीय राजनीति का चुनावी रंग पूरी तरह दिखाई देने लगेगा।

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