जयपुर, 30 सितंबर। गुलाबी शहर जयपुर में पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर की ओर से राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) के सहयोग से ऑक्टेव 2026’ का आयोजन 1 से 4 अक्टूबर तक किया जाएगा।
चार दिवसीय इस सांस्कृतिक महोत्सव में पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों की लोक एवं शास्त्रीय कला, संगीत, पारंपरिक वेशभूषा, शिल्प, चित्रकला और खानपान को एक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।
आयोजन का उद्घाटन -1 अक्टूबर को शाम 7 बजे** राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में होगा। उद्घाटन समारोह में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे मुख्य अतिथि होंगे, जबकि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत समारोह की अध्यक्षता करेंगे। आरआईसी निदेशक निहाल चंद गोयल भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे।
आठ राज्यों की संस्कृति एक मंच पर
ऑक्टेव 2026 में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा की सांस्कृतिक परंपराओं को जयपुरवासियों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार इस महोत्सव में 250 से अधिक लोक कलाकार हिस्सा लेंगे। प्रस्तुतियों का कोरियोग्राफिक संयोजन तरुण प्रधान करेंगे, जबकि आयोजन का विशेष वातावरण कोलकाता के अनूप गिरी द्वारा डिजाइन किया गया है।
मणिपुरी रास से सत्रिया तक
चार दिवसीय आयोजन में पूर्वोत्तर की अलग-अलग नृत्य परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। मणिपुरी रास, असम का शास्त्रीय सत्रिया, सिक्किम का सिंघी छम यानी स्नो लायन नृत्य, तमांग सेलो, त्रिपुरा का होजागिरी और ममिता, तथा अरुणाचल प्रदेश के जुजु-झा-झा और ताई खामती जैसे लोक नृत्य दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
इसके अलावा नागालैंड का समूह गायन और समापन अवसर पर नागालैंड के **‘डिवाइन कनेक्शन’ की प्रस्तुति भी कार्यक्रम का हिस्सा होगी।
पारंपरिक परिधान और आभूषण भी होंगे आकर्षण
1 और 2 अक्टूबर को आयोजित होने वाले एथनिक कॉस्ट्यूम शो में पूर्वोत्तर के आठों राज्यों के पारंपरिक परिधान और आभूषण प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके माध्यम से अलग-अलग समुदायों की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक जीवनशैली की झलक देखने को मिलेगी।
दो दिवसीय सेमिनार में संस्कृति पर मंथन
महोत्सव के दौरान 1 और 2 अक्टूबर को दो दिवसीय सेमिनार भी आयोजित किया जाएगा। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से शिक्षाविद और विषय विशेषज्ञ पूर्वोत्तर भारत की कला, परंपराओं, संस्कृति और सामाजिक-सांस्कृतिक बदलावों पर चर्चा करेंगे। सेमिनार का संयोजन सिक्किम विश्वविद्यालय के प्रो. संतोष कुमार करेंगे।
शिल्प मेले से लेकर पूर्वोत्तर के व्यंजनों तक
ऑक्टेव 2026 केवल नृत्य और संगीत तक सीमित नहीं रहेगा। 1 से 4 अक्टूबर तक सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक शिल्प मेला भी लगाया जाएगा। यहां पूर्वोत्तर के पारंपरिक हस्तशिल्प और कलाकृतियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही दर्शकों को पूर्वोत्तर भारत के शाकाहारी व्यंजनों का स्वाद लेने का अवसर भी मिलेगा।
चित्रकार शिविर में भी उभर रही पूर्वोत्तर की तस्वीर
मुख्य महोत्सव से पहले जयपुर में सात दिवसीय नॉर्थ-ईस्ट पेंटर्स कैंप भी आयोजित किया जा रहा है। इसमें पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों से आए कलाकार अपनी कला के माध्यम से वहां की संस्कृति और जीवनशैली को कैनवास पर उतार रहे हैं। शिविर में तैयार चित्रों के साथ कलाकारों की पूर्व रचनाओं की प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। )
देश की सांस्कृतिक विविधता को करीब से जानने का अवसर
‘ऑक्टेव’ का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत की कला और सांस्कृतिक विरासत को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाना और लोगों को वहां की विविध परंपराओं से परिचित कराना है। यह आयोजन वर्ष 2008 में गोवा से शुरू हुआ था और इसके बाद देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित किया जाता रहा है। राजस्थान में भी पहले जोधपुर और अजमेर में इसका आयोजन हो चुका है।
जयपुर में होने वाला ऑक्टेव 2026 पूर्वोत्तर के आठ राज्यों की कला, संस्कृति और परंपराओं को एक ही मंच पर देखने का अवसर देगा। चार दिनों तक होने वाली प्रस्तुतियों, शिल्प मेले, सेमिनार, पारंपरिक परिधान और खानपान के जरिए जयपुर में पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक विविधता का अनूठा रंग देखने को मिलेगा।





