जयपुर। राजस्थान में समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) लागू करने की दिशा में भजनलाल शर्मा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य मंत्रिमंडल ने ‘राजस्थान समान नागरिक संहिता विधेयक-2026’ के मसौदे को मंजूरी दे दी है। अब सरकार इसे 20 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में पेश करने की तैयारी में है।
अप्रैल में शुरू हुई थी कवायद
राजस्थान में UCC को लेकर प्रक्रिया अप्रैल 2026 में शुरू हुई थी। इसके बाद 6 मई को पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में प्रारूप समिति का गठन किया गया। समिति को राज्य की परिस्थितियों, विभिन्न समुदायों की परंपराओं और संवैधानिक प्रावधानों का अध्ययन कर मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
समिति ने तैयार मसौदा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंपा, जिसके बाद सरकार ने इसके कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की समीक्षा की और मंत्रिमंडल के सामने प्रस्ताव रखा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब विधेयक को विधानसभा में लाने का रास्ता साफ हो गया है।
विवाह और तलाक के लिए समान नियम
प्रस्तावित UCC का दायरा केवल विवाह तक सीमित नहीं है। इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और भरण-पोषण जैसे व्यक्तिगत नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था का प्रस्ताव है। साथ ही लिव-इन रिलेशनशिप को भी कानूनी दायरे में लाने की तैयारी है।
ड्राफ्ट के अनुसार अलग-अलग धर्मों में विवाह की पारंपरिक रस्मों को बनाए रखने की बात कही गई है। यानी हिंदू विवाह में फेरे, मुस्लिम विवाह में निकाह, सिख विवाह में आनंद कारज और ईसाई विवाह की धार्मिक परंपराएं जारी रह सकती हैं, लेकिन विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव है।
60 दिन में विवाह पंजीकरण का प्रस्ताव
प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार विवाह होने के 60 दिनों के भीतर उसका पंजीकरण कराना अनिवार्य किया जा सकता है। इसका उद्देश्य सभी विवाहों का कानूनी रिकॉर्ड तैयार करना और वैवाहिक अधिकारों से जुड़े विवादों को कम करना बताया गया है।
बहुविवाह पर रोक का प्रस्ताव
UCC के मसौदे में बहुविवाह पर प्रतिबंध का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके साथ ही उत्तराधिकार के मामले में पुत्र और पुत्री को समान अधिकार देने की बात कही गई है। मसौदे में कुछ पारिवारिक और संपत्ति संबंधी अधिकारों को भी एक समान कानूनी ढांचे में लाने का प्रस्ताव है।
जनजातीय समुदायों को लेकर अलग प्रावधान
रिपोर्टों के अनुसार प्रस्तावित कानून में जनजातीय समुदायों को फिलहाल इसके दायरे से बाहर रखने का प्रावधान है, ताकि उनकी पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं को संरक्षण दिया जा सके।
विधानसभा में होगी बड़ी राजनीतिक बहस
UCC विधेयक के विधानसभा में पेश होने के साथ ही राजस्थान में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। सरकार इसे समान नागरिक अधिकारों और एक समान कानूनी व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है, जबकि विपक्ष विधेयक के प्रावधानों, प्रक्रिया और विभिन्न समुदायों पर इसके प्रभाव को लेकर सवाल उठा सकता है।
20 अगस्त से शुरू होने वाला विधानसभा सत्र इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि UCC के साथ सरकार कई अन्य महत्वपूर्ण विधेयक भी सदन में ला सकती है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि विधानसभा में UCC विधेयक पर किस तरह की चर्चा होती है और इसे आगे की विधायी प्रक्रिया में क्या स्वरूप मिलता है।





