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पचपदरा रिफाइनरी पर फिर छिड़ी सियासी जंग, शिलान्यास, कार्यारंभ और श्रेय की लड़ाई के बीच विकास की राजनीति

राजनीतिक श्रेय की इस लड़ाई के बीच स्थानीय जनता की अपेक्षाएं रोजगार,औद्योगिक निवेश, और क्षेत्रीय आर्थिक परिवर्तन से जुड़ी हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रिफाइनरी राजस्थान की अर्थव्यवस्था और विशेषकर पश्चिमी राजस्थान के विकास में कितनी निर्णायक भूमिका हैं।

NSI Admin04 Jul 2026, 03:40 AM19 views4 min read
पचपदरा रिफाइनरी पर फिर छिड़ी सियासी जंग, शिलान्यास, कार्यारंभ और श्रेय की लड़ाई के बीच विकास की राजनीति

पीयूष पुरोहित की रिपोर्ट

जयपुर। राजस्थान की बहुप्रतीक्षित पचपदरा रिफाइनरी के लोकार्पण आज है। इस परियोजना लोकार्पण अवसर पर एक बार फिर इस परियोजना के इतिहास, शिलान्यास और विकास का श्रेय लेने को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जुली के बयानों ने इस मुद्दे को राजनीतिक बहस का केंद्र बना दिया है। तीनों नेताओं के बयान यह संकेत देते हैं कि रिफाइनरी केवल औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि राजनीतिक उपलब्धियों के दावे का भी बड़ा प्रतीक बन चुकी है।

अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें मुख्यमंत्री ने कहा था कि वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पचपदरा रिफाइनरी का शिलान्यास किया था। गहलोत ने इसे तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए कहा कि परियोजना का वास्तविक शिलान्यास वर्ष 2013 में तत्कालीन यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी और तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली द्वारा किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने 2013 के बाद पांच वर्षों तक इस महत्वाकांक्षी परियोजना को ठंडे बस्ते में डालकर रखा, जिसके कारण इसकी अनुमानित लागत लगभग 37 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 80 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

गहलोत ने यह भी कहा कि राजस्थान सरकार ने दूरदर्शिता दिखाते हुए एचपीसीएल को परियोजना के लिए तैयार करने हेतु 26 प्रतिशत हिस्सेदारी ली, जबकि सामान्यतः ऐसी रिफाइनरी परियोजनाओं में राज्य सरकार की हिस्सेदारी नहीं होती। उनके अनुसार, इसी निर्णय के कारण एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (एचआरआरएल) का गठन संभव हुआ और परियोजना आगे बढ़ सकी।

दूसरी ओर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस के दावों को खारिज करते हुए कहा कि वर्ष 2013 में केवल चुनावी लाभ के लिए "कागजी शिलान्यास" किया गया था। उनके अनुसार उस समय न तो पर्याप्त बजट था, न जमीन और न ही पर्यावरणीय मंजूरियां पूरी थीं। राठौड़ का दावा है कि 2014 में भाजपा सरकार ने एचपीसीएल के साथ हुए समझौते का पुनः मोलभाव (री-नेगोशिएशन) कर राजस्थान पर पड़ने वाला हजारों करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ कम किया और जनवरी 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परियोजना का वास्तविक कार्यारंभ कराया।

भाजपा ने कांग्रेस पर यह आरोप भी लगाया कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच कांग्रेस सरकार की आंतरिक गुटबाजी और प्रशासनिक शिथिलता के कारण परियोजना की गति धीमी रही। भाजपा का कहना है कि वर्तमान डबल इंजन सरकार परियोजना को तेजी से पूरा कर राजस्थान के औद्योगिक विकास का नया अध्याय लिख रही है।

इसी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जुली का बयान अपेक्षाकृत संतुलित नजर आया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पचपदरा आगमन पर स्वागत करते हुए स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि इस परियोजना की परिकल्पना कांग्रेस सरकार ने की थी और लगभग 85 प्रतिशत कार्य कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पूरा हुआ, इसलिए यह कांग्रेस के लिए गर्व का विषय है।

जुली ने भाजपा सरकार को सलाह दी कि वह रिफाइनरी के आसपास मजबूत औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स ढांचे का विकास करे ताकि स्थानीय उद्योगों और छोटे-मझोले उद्यमों को इसका अधिकतम लाभ मिल सके। उन्होंने रिफाइनरी के साथ पेट्रोलियम क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) केंद्र स्थापित करने और राजस्थान को पेट्रोलियम नॉलेज हब बनाने की भी मांग उठाई।

पचपदरा रिफाइनरी को लेकर विवाद मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर केंद्रित है—पहला, परियोजना का वास्तविक शिलान्यास किसने किया; दूसरा, परियोजना को गति किस सरकार ने दी; और तीसरा, इसके निर्माण में सबसे बड़ा योगदान किसका रहा।

कांग्रेस वर्ष 2013 के शिलान्यास, राज्य सरकार की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी और परियोजना की मूल परिकल्पना को अपनी उपलब्धि बता रही है। वहीं भाजपा का तर्क है कि केवल शिलान्यास से परियोजना जमीन पर नहीं उतरती और आवश्यक वित्तीय, प्रशासनिक एवं तकनीकी मंजूरियों के बाद 2018 में वास्तविक निर्माण कार्य शुरू हुआ।

हालांकि दोनों दल अपने-अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को प्रमुखता से प्रस्तुत कर रहे हैं, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि इतनी बड़ी आधारभूत परियोजनाएं सामान्यतः एक से अधिक सरकारों के कार्यकाल में पूरी होती हैं। पचपदरा रिफाइनरी भी ऐसी ही परियोजना है, जिसकी अवधारणा, शिलान्यास, वित्तीय पुनर्गठन, निर्माण और अब लोकार्पण—ये सभी अलग-अलग राजनीतिक चरणों में संपन्न हुए हैं।

राजनीतिक श्रेय की इस लड़ाई के बीच स्थानीय जनता की अपेक्षाएं रोजगार, औद्योगिक निवेश, सहायक उद्योगों के विकास और क्षेत्रीय आर्थिक परिवर्तन से जुड़ी हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रिफाइनरी राजस्थान की अर्थव्यवस्था और विशेषकर पश्चिमी राजस्थान के विकास में कितनी निर्णायक भूमिका निभा पाती है।

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