रांची। भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों पर सोमवार को हुए पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार, 11 अगस्त को झारखंड बंद का आह्वान किया है। बंद के दौरान राजधानी रांची समेत राज्य के कई हिस्सों में भाजपा कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। रांची के हरमू चौक पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने टायर जलाकर सड़क जाम किया और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी की। इससे इलाके में यातायात प्रभावित हुआ और पुलिस को मौके पर तैनात किया गया।
छात्रों पर लाठीचार्ज के बाद भाजपा का बंद-दरअसल, झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर प्रतियोगी अभ्यर्थी कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। सोमवार को प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर मार्च कर रहे थे। मार्च के दौरान कई बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की गई, जिसके बाद पुलिस ने पानी की बौछार, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने की जानकारी सामने आई।
पुलिस कार्रवाई के बाद भाजपा ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और 11 अगस्त को राज्यव्यापी बंद का ऐलान किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की मौजूदगी में बंद की घोषणा की थी। पार्टी ने छात्रों के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
हरमू चौक पर टायर जलाकर प्रदर्शन
मंगलवार सुबह से ही भाजपा कार्यकर्ता अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शन करते नजर आए। रांची के हरमू चौक पर कार्यकर्ताओं ने बीच सड़क पर टायर जलाए और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। सड़क पर प्रदर्शन के कारण यातायात बाधित हुआ। स्थिति को देखते हुए पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया।
भाजपा का आरोप है कि छात्रों की मांगों पर सरकार को बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए था, लेकिन आंदोलन कर रहे युवाओं पर बल प्रयोग किया गया। पार्टी ने इसे छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश बताया है।
17 दिन से जारी है छात्रों का आंदोलन
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच, परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और कुछ परीक्षाओं को रद्द करने जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। भाजपा का कहना है कि छात्र पिछले 17 दिनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ सरकार ने दमनात्मक रवैया अपनाया है। उन्होंने पिछले वर्षों में हुई भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच की मांग भी उठाई है। भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व से भी इस मामले में स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है।
विधानसभा मार्च में क्या हुआ था?
सोमवार को प्रदर्शनकारी छात्र विधानसभा की ओर मार्च कर रहे थे। रास्ते में पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए थे। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस और छात्रों के बीच टकराव की स्थिति बनी।
पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले पानी की बौछार और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इसके बादरात में लाठीचार्ज किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को चोटें आईं। भाजपा ने इसी कार्रवाई को अपने बंद का मुख्य आधार बनाया है।
आंदोलनकारी नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ी
इसी आंदोलन के दौरान नौ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत भी बिगड़ गई। उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। रिपोर्ट के अनुसार, उनके ब्लड शुगर लेवल में भारी गिरावट आई थी और डॉक्टरों ने उनकी स्थिति गंभीर बताई। खराब स्वास्थ्य के बावजूद महतो सोमवार को प्रदर्शनकारियों के साथ विधानसभा मार्च में शामिल हुए और बाद में स्ट्रेचर से लोगों को संबोधित किया।
उनका कहना था कि सरकार को छात्रों की मांगों का समाधान बातचीत के जरिए करना चाहिए।
बंद से यातायात और सामान्य जनजीवन पर असर
भाजपा ने बंद की शुरुआत सुबह 8 बजे से करने की घोषणा की थी। पार्टी की ओर से आवश्यक सेवाओं को बंद से अलग रखने की बात कही गई। हालांकि, सड़कों पर प्रदर्शन और कुछ स्थानों पर सड़क जाम के कारण यातायात प्रभावित होने की खबरें हैं। रांची में प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।
हरमू चौक पर टायर जलाकर प्रदर्शन के कारण अरगोड़ा चौक से हरमू चौक की ओर जाने वाले मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति पर नजर रखी।
कांग्रेस ने भी पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल-छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर लाठीचार्ज स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सरकार की ओर से छात्रों की समस्याओं को लेकर उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया और दावा किया कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों में गिरफ्तारियां हुई हैं।
इस बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार की ओर से भी कहा गया है कि मामले में दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत से समाधान निकलना अब सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
झारखंड बंद ने छात्र आंदोलन को एक बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदल दिया है। एक तरफ अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा पुलिस कार्रवाई को मुद्दा बनाकर राज्य सरकार पर हमलावर है।





