जयपुर। राजस्थान में आगामी नगर निकाय चुनावों से पहले कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक असंतोष खुलकर सामने आया है। पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ से जुड़े पांच प्रमुख नेताओं ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। नेताओं ने संगठन में प्रोटोकॉल का पालन नहीं होने और वरिष्ठ पदाधिकारियों की ओर से उपेक्षा किए जाने को अपनी नाराजगी की प्रमुख वजह बताया है।
इस्तीफा देने वाले नेताओं ने अपना त्यागपत्र कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व को भेजा है। उनका कहना है कि संगठन में काम करने के बावजूद उन्हें अपेक्षित जिम्मेदारी और सम्मान नहीं मिल रहा है। नेताओं की नाराजगी ऐसे समय सामने आई है, जब प्रदेश में आगामी नगर निकाय चुनावों की तैयारियां तेज हो रही हैं और कांग्रेस संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की कोशिश में जुटी है।
संगठन में सम्मान और जिम्मेदारी को लेकर नाराजगी
सामूहिक इस्तीफे के पीछे नेताओं ने संगठनात्मक व्यवस्था और वरिष्ठ नेतृत्व के व्यवहार को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पार्टी में लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को उनकी भूमिका के अनुरूप जिम्मेदारी नहीं मिल रही है। इसी नाराजगी के चलते पांच नेताओं ने एक साथ पद छोड़ने का फैसला किया।
इस्तीफा देने वाले नेताओं की ओर से अब दिल्ली जाकर पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व से मुलाकात करने की भी बात कही गई है। वे अपनी शिकायतें सीधे कांग्रेस नेतृत्व के सामने रखने की तैयारी में हैं।
निकाय चुनाव से पहले चुनौती
राजस्थान में नगर निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां पहले ही तेज हो चुकी हैं। आरक्षण प्रक्रिया सामने आने के बाद विभिन्न दलों में संभावित उम्मीदवारों और स्थानीय संगठन को लेकर बैठकों का दौर चल रहा है। ऐसे समय कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के नेताओं की सामूहिक नाराजगी पार्टी के लिए संगठनात्मक चुनौती मानी जा रही है।
कांग्रेस के लिए निकाय चुनावों में स्थानीय संगठन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने अब नाराज नेताओं को मनाने और संगठन में आपसी समन्वय बनाए रखने की चुनौती है।
नेतृत्व के सामने असंतोष दूर करने की चुनौती
राजस्थान कांग्रेस में पहले भी संगठनात्मक नियुक्तियों और नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर अलग-अलग स्तरों पर असंतोष सामने आता रहा है। ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर पार्टी के भीतर समन्वय और कार्यकर्ताओं की नाराजगी के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।
अब देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इन इस्तीफों को लेकर क्या कदम उठाता है और नाराज नेताओं के साथ बातचीत कर मामले को सुलझाने की कोशिश कितनी प्रभावी रहती है। आगामी नगर निकाय चुनावों से पहले संगठन की एकजुटता बनाए रखना पार्टी के लिए अहम माना जा रहा है।





