कोलकाता। पश्चिम बंगाल में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लेकर की गई विवादित टिप्पणी के मामले में भाजपा के राज्यसभा सांसद नागेंद्र राय उर्फ अनंत महाराज को बड़ा झटका लगा है। पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने गुरुवार, 13 अगस्त 2026 को उन्हें दिया गया राज्य का प्रतिष्ठित ‘बंग विभूषण’ सम्मान वापस लेने और निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया। सरकार ने उनके नाम को सम्मान प्राप्त करने वालों की आधिकारिक सूची से हटाने के भी निर्देश दिए हैं।
राज्य सरकार के सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि सामने आए तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद यह पाया गया कि नागेंद्र राय द्वारा बंग विभूषण सम्मान को अपने पास बनाए रखना इस सम्मान की गरिमा, प्रतिष्ठा और उद्देश्य के अनुरूप नहीं है। इसी आधार पर सम्मान को तत्काल प्रभाव से वापस लेकर निरस्त कर दिया गया।
नेताजी पर टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद
नागेंद्र राय, जिन्हें अनंत महाराज के नाम से भी जाना जाता है, ने हाल में नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज को लेकर ऐसी टिप्पणियां की थीं, जिन पर पश्चिम बंगाल में व्यापक विवाद खड़ा हो गया। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने नेताजी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की और उन्हें ‘वार क्रिमिनल’ तक बताया। उनकी टिप्पणियों के बाद राजनीतिक दलों के साथ-साथ सामाजिक और बौद्धिक वर्गों में भी विरोध देखने को मिला।
राजबंशी समुदाय के कई प्रमुख बुद्धिजीवियों ने भी उनकी टिप्पणियों की आलोचना की थी। जुलाई में जारी एक संयुक्त बयान में शिक्षाविदों, लेखकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अन्य प्रमुख लोगों ने टिप्पणियों को भ्रामक और अपमानजनक बताते हुए नेताजी के योगदान और स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका का सम्मान करने की बात कही थी।
फरवरी में मिला था बंग विभूषण
खास बात यह है कि अनंत महाराज को यही सम्मान 21 फरवरी 2026 को तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने प्रदान किया था। उस समय वह भाजपा के राज्यसभा सांसद थे। बंग विभूषण को पश्चिम बंगाल सरकार के प्रमुख नागरिक सम्मानों में माना जाता है।
सम्मान मिलने के कुछ ही महीनों बाद उसे वापस लिए जाने से इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि अब पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है और कार्रवाई उसी सरकार ने की है।
सरकार ने क्या कहा?
सरकारी आदेश में किसी एक टिप्पणी को सीधे आधार बताते हुए उसका उल्लेख नहीं किया गया, लेकिन आदेश ऐसे समय आया है जब नेताजी पर अनंत महाराज की टिप्पणियों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद तेज था। सरकार ने स्पष्ट किया कि सम्मान को बनाए रखना उसकी गरिमा और उद्देश्य के अनुरूप नहीं है।
सम्मान वापस लिए जाने के बाद अनंत महाराज अब स्वयं को बंग विभूषण सम्मान प्राप्तकर्ता के रूप में प्रस्तुत नहीं कर सकेंगे। सरकार ने संबंधित रिकॉर्ड और आधिकारिक सूची से उनका नाम हटाने का भी निर्देश दिया है।
BJP के लिए भी बढ़ी चुनौती
इस घटनाक्रम ने भाजपा के सामने भी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। अनंत महाराज उत्तर बंगाल के कूचबिहार क्षेत्र में प्रभाव रखने वाले प्रमुख राजबंशी नेता हैं और 2023 में भाजपा समर्थित उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा पहुंचे थे। ऐसे में उनके खिलाफ राज्य सरकार की कार्रवाई को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस बंगाल की राजनीति और सामाजिक चेतना में बेहद संवेदनशील एवं सम्मानित व्यक्तित्व हैं। ऐसे में उनके खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों पर सरकार की कार्रवाई ने बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि भाजपा संगठन इस पूरे मामले में अनंत महाराज के खिलाफ आगे क्या कदम उठाता है।




