कोलकाता,स्टेट डेस्क । पश्चिम बंगाल की राजनीति में शुक्रवार को उस समय हलचल मच गई जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता अनुब्रत मंडल का एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। ऑडियो के आधार पर विपक्ष ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
वायरल ऑडियो को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, ऑडियो की प्रामाणिकता की अब तक किसी अधिकृत एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है और न ही उसमें किए गए दावों का आधिकारिक सत्यापन हुआ है।
भारतीय जनता पार्टी सहित विपक्षी दलों का कहना है कि यदि वायरल ऑडियो वास्तविक है तो इसकी फोरेंसिक जांच कराई जानी चाहिए और यदि किसी प्रकार के वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने पूरे विवाद को खारिज करते हुए इसे विपक्ष की "राजनीतिक साजिश" बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि अपुष्ट ऑडियो के आधार पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सरकार को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। टीएमसी का कहना है कि बिना जांच और प्रमाण के लगाए जा रहे आरोपों का कोई आधार नहीं है।
गौरतलब है कि अनुब्रत मंडल पहले भी विभिन्न मामलों में जांच एजेंसियों के रडार पर रहे हैं। ऐसे में यह नया विवाद सामने आने के बाद राज्य की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मामले की आधिकारिक जांच होती है तो उसके निष्कर्ष आने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
जांच के बाद ही होगी तस्वीर साफ
फिलहाल इस मामले में न तो किसी जांच एजेंसी ने कथित ऑडियो को प्रमाणित किया है और न ही उसमें किए गए दावों की पुष्टि की है। इसलिए इस पूरे घटनाक्रम को फिलहाल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और वायरल दावों के रूप में ही देखा जा रहा है।


