जयपुर। राजस्थान में लंबे समय से लंबित पंचायत राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के चुनावों को लेकर बड़ी प्रगति हुई है। राज्य सरकार ने राजस्थान हाईकोर्ट में शपथ पत्र (एफिडेविट) प्रस्तुत कर चुनाव कराने की प्रस्तावित समय-सीमा और पूरी प्रक्रिया का खाका पेश कर दिया है। इसके साथ ही प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनावों का इंतजार कर रहे लाखों मतदाताओं, जनप्रतिनिधियों और संभावित उम्मीदवारों के लिए चुनाव की राह साफ होती नजर आ रही है।
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने हाईकोर्ट में चुनाव प्रक्रिया से संबंधित शपथ पत्र दाखिल किया। इसमें सरकार ने बताया कि चुनाव संपन्न कराने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी तैयारियां चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएंगी। सरकार ने अदालत को यह भी भरोसा दिलाया कि चुनाव प्रक्रिया को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के लिए सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है।
शपथ पत्र में सरकार ने स्पष्ट किया कि चुनाव से पहले वार्डों और पंचायत क्षेत्रों का परिसीमन, आरक्षण निर्धारण, मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन तथा अन्य वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इन प्रक्रियाओं के बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम जारी करेगा और मतदान की तिथियों की घोषणा की जाएगी।
गौरतलब है कि राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव लंबे समय से लंबित हैं। परिसीमन, आरक्षण और अन्य प्रशासनिक कारणों से चुनाव निर्धारित समय पर नहीं हो सके थे। इसको लेकर विभिन्न याचिकाओं पर राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। अदालत ने सरकार से चुनाव कराने की स्थिति और समय-सीमा स्पष्ट करने को कहा था, जिसके जवाब में सरकार ने यह शपथ पत्र प्रस्तुत किया।
सरकार की ओर से हाईकोर्ट में चुनाव प्रक्रिया का विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किए जाने के बाद अब माना जा रहा है कि प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनावों की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। अब अगली सुनवाई और राज्य निर्वाचन आयोग की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
राजनीतिक दलों ने भी चुनाव की संभावनाओं को देखते हुए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। संभावित उम्मीदवार अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हो गए हैं और चुनावी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। वहीं ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के मतदाताओं को भी अब चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
यदि हाईकोर्ट सरकार की प्रस्तुत योजना से संतुष्ट होता है और राज्य निर्वाचन आयोग निर्धारित प्रक्रिया पूरी करता है, तो प्रदेश में जल्द ही पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों का कार्यक्रम घोषित होने की संभावना है। इससे स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में नई जनप्रतिनिधि व्यवस्था स्थापित होने का मार्ग प्रशस्त होगा।





