मंत्रिमंडल की बैठक में ‘राजस्थान ट्रीज (प्रोटेक्शन) बिल-2026’ के प्रारूप को मंजूरी
जयपुर। राजस्थान में पेड़ों के संरक्षण और अवैध कटाई पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ‘राजस्थान ट्रीज (प्रोटेक्शन) बिल-2026’ के प्रारूप को मंजूरी दी गई। सरकार अब इस विधेयक को आगामी विधानसभा सत्र में पेश करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य गैर-वन क्षेत्रों में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर नियंत्रण करना, महत्वपूर्ण पेड़ प्रजातियों का संरक्षण करना और राज्य में हरित क्षेत्र बढ़ाना है।
29 प्रजातियां संरक्षण के दायरे में
प्रस्तावित कानून में कुल 29 महत्वपूर्ण पेड़ प्रजातियों को विशेष संरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। इनमें राजस्थान का राज्य वृक्ष खेजड़ी, रोहिड़ा और पीपल सहित कई प्रमुख प्रजातियां शामिल हैं। इसके अलावा बरगद, लासोड़ा, तेंदू, महुआ, कैर और चिरौंजी जैसी प्रजातियों को भी संरक्षण सूची में रखा गया है। सरकार का कहना है कि इन प्रजातियों के संरक्षण से जैव विविधता को बढ़ावा देने के साथ-साथ रेगिस्तानी और ग्रामीण क्षेत्रों के पर्यावरण को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
बिना अनुमति पेड़ काटने पर रोक
प्रस्तावित कानून का एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि निर्धारित प्रजातियों के पेड़ को बिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के काटने या कटवाने की अनुमति नहीं होगी। यह प्रावधान केवल सरकारी जमीन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निर्धारित शर्तों के अधीन निजी भूमि पर खड़े पेड़ों पर भी लागू होगा।
यदि किसी पेड़ को किसी आवश्यक कारण से काटने की अनुमति दी जाती है तो निर्धारित संख्या में नए पेड़ लगाने का प्रावधान भी रखा गया है। इस तरह सरकार पेड़ कटाई के साथ-साथ उसकी भरपाई के लिए पौधरोपण को भी कानून का हिस्सा बनाना चाहती है।
अवैध कटाई पर एक लाख रुपये तक जुर्माना
प्रस्तावित विधेयक में पेड़ों की अवैध कटाई को गंभीरता से लिया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को एक वर्ष तक की सजा या एक लाख रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों का सामना करना पड़ सकता है। प्रस्तावित कानून के तहत अपराधों को संज्ञेय और जमानती श्रेणी में रखा गया है।
इस प्रावधान का उद्देश्य खास तौर पर बिना अनुमति पेड़ों की कटाई और व्यावसायिक अथवा अन्य गतिविधियों के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों को हटाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना है।
खेजड़ी के लिए कानून क्यों महत्वपूर्ण?
राजस्थान के शुष्क और रेगिस्तानी इलाकों में खेजड़ी का विशेष पर्यावरणीय और सामाजिक महत्व है। यह पेड़ कम पानी वाले क्षेत्रों में भी जीवित रह सकता है और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। खेजड़ी से जुड़ा संरक्षण आंदोलन राजस्थान के इतिहास में भी विशेष स्थान रखता है।
1730 के खेजड़ली बलिदान की घटना में अमृता देवी बिश्नोई सहित बड़ी संख्या में बिश्नोई लोगों ने खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। यही कारण है कि खेजड़ी राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का प्रमुख प्रतीक मानी जाती है।
मरुस्थलीकरण रोकने और हरित क्षेत्र बढ़ाने पर जोर
राज्य सरकार के अनुसार नए कानून का एक प्रमुख उद्देश्य मरुस्थलीकरण को रोकना और राजस्थान का हरित क्षेत्र बढ़ाना है। पेड़ों की कटाई पर नियंत्रण से मिट्टी का संरक्षण, जैव विविधता और स्थानीय पर्यावरण को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
खासकर पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में पेड़ों और झाड़ियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे क्षेत्रों में वनस्पति मिट्टी को स्थिर रखने, पशुधन के लिए चारा उपलब्ध कराने और स्थानीय पारिस्थितिकी को बनाए रखने में मदद करती है।
ग्रामीण और रेगिस्तानी अर्थव्यवस्था को भी फायदा
सरकार का मानना है कि संरक्षित पेड़ प्रजातियों के संरक्षण का लाभ केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रहेगा। इससे ग्रामीण आबादी, रेगिस्तानी क्षेत्रों के निवासियों और जनजातीय समुदायों की आजीविका को भी फायदा मिल सकता है। कई पेड़ प्रजातियां स्थानीय लोगों को चारा, फल, ईंधन और अन्य उपयोगी संसाधन उपलब्ध कराती हैं।
विधानसभा में पेश होगा विधेयक
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब विधेयक को विधानसभा में पेश किया जाना है। सदन में चर्चा और पारित होने के बाद ही यह कानून का रूप ले सकेगा। विधानसभा में इसके प्रावधानों पर चर्चा के दौरान पेड़ों की कटाई की अनुमति, निजी भूमि पर कानून का प्रभाव, पौधरोपण की बाध्यता और दंडात्मक प्रावधानों जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रह सकते हैं।
राजस्थान सरकार का यह प्रस्ताव खेजड़ी सहित महत्वपूर्ण पेड़ प्रजातियों को कानूनी संरक्षण देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि विधेयक विधानसभा से पारित होकर लागू होता है, तो पेड़ों की कटाई और संरक्षण को लेकर राज्य में पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट और कड़े नियम लागू होंगे।





