यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब के जहाजों की नाकेबंदी की धमकी ने बढ़ाई बाजार की चिंता
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। प्रमुख निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि यदि होरमुज़ जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के जरिए होने वाली तेल आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है, तो इस वर्ष की अंतिम तिमाही में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच सकती है। हालांकि बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह उसका बेस केस (मुख्य अनुमान) नहीं, बल्कि जोखिम की स्थिति में संभावित परिदृश्य है।
हाल के सप्ताहों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव तथा यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के जहाजों की नाकेबंदी की धमकी ने वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इन घटनाक्रमों के कारण फारस की खाड़ी और लाल सागर के समुद्री मार्गों से तेल आपूर्ति को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
तेल आपूर्ति में कमी से बढ़ी चिंता
20 जुलाई को जारी अपनी रिपोर्ट में गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते फारस की खाड़ी से कच्चे तेल की आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र से होने वाला तेल प्रवाह युद्ध-पूर्व स्तर के मुकाबले काफी नीचे आ गया है, जिससे वैश्विक बाजार में सप्लाई को लेकर जोखिम बढ़ गया है।
हालांकि बैंक का आधार अनुमान अभी भी अपेक्षाकृत संतुलित है। यदि क्षेत्र में तनाव धीरे-धीरे कम होता है, तो वर्ष 2026 की अंतिम तिमाही में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत करीब 80 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है। वहीं वर्ष 2027 में यह औसत 75 डॉलर प्रति बैरल तक आने का अनुमान जताया गया है।
होरमुज़ जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम?
होरमुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर निर्यात होने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। यदि यहां लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है और साथ ही लाल सागर में भी जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
डीजल बाजार पर भी बढ़ सकता है दबाव
रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरी तिमाही के दौरान वैश्विक तेल भंडार में कमी आई है, जिससे बाजार पहले की तुलना में अधिक संवेदनशील हो गया है। हालांकि चीन की ओर से कच्चे तेल के आयात में कुछ नरमी और वैश्विक मांग में लचीलापन कीमतों में संभावित उछाल को कुछ हद तक सीमित कर सकता है।
गोल्डमैन सैक्स ने निवेशकों को यूरोप के डीजल बाजार पर भी नजर रखने की सलाह दी है। बैंक का मानना है कि रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमले, समुद्री तूफानों का खतरा, अत्यधिक गर्मी और रिफाइनरी रखरखाव में देरी जैसे कारण डीजल की आपूर्ति को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल 88 डॉलर के आसपास कारोबार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिलहाल ब्रेंट कच्चा तेल करीब 88.54 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इससे पहले अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के शुरुआती दौर में इसकी कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर तक पहुंच गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति, होरमुज़ जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम ही यह तय करेंगे कि कच्चे तेल की कीमतें किस दिशा में आगे बढ़ेंगी।





