केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पेश करेंगे 'वंदे मातरम्' बिल
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को लेकर एक महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी में है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को राज्यसभा में 'वंदे मातरम्' बिल पेश करेंगे। प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत को भी वही कानूनी संरक्षण प्रदान करना है, जो वर्तमान में राष्ट्रीय गान 'जन गण मन' को प्राप्त है।
सरकार का मानना है कि 'वंदे मातरम्' देश की स्वतंत्रता की लड़ाई का प्रतीक रहा है और करोड़ों भारतीयों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इसके सम्मान की रक्षा के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान आवश्यक हैं।
राष्ट्रीय सम्मान कानून में संशोधन का प्रस्ताव-प्रस्तावित विधेयक के तहत राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) में संशोधन किया जाएगा। संशोधन के बाद राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को भी कानूनी रूप से वही दर्जा और संरक्षण मिलेगा, जो राष्ट्रीय गान 'जन गण मन' को प्राप्त है।
यदि यह विधेयक संसद से पारित हो जाता है और राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाती है, तो राष्ट्रीय गीत का जानबूझकर अपमान करना या उसके गायन में बाधा डालना दंडनीय अपराध माना जाएगा।
क्या होंगे दंड के प्रावधान?
प्रस्तावित कानून के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत का अपमान करता है, उसके गायन में बाधा उत्पन्न करता है या ऐसा कोई कार्य करता है जिससे राष्ट्रीय गीत का अनादर हो, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक का कारावास, जुर्माना, या दोनों की सजा का प्रावधान किया गया है।
वर्तमान कानून क्या कहता है?
वर्तमान में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 के तहत राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रीय गान के सम्मान की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान हैं। राष्ट्रीय गान के दौरान सम्मानपूर्वक खड़ा होना और उसके अपमान या गायन में बाधा उत्पन्न करने जैसे कृत्य कानून के दायरे में आते हैं।
हालांकि, राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के संबंध में अभी तक ऐसा स्पष्ट दंडात्मक प्रावधान कानून में शामिल नहीं है। प्रस्तावित संशोधन इसी कमी को दूर करने का प्रयास माना जा रहा है।
स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा है 'वंदे मातरम्'-'वंदे मातरम्' भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना का प्रमुख प्रतीक रहा है। यह गीत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास आनंदमठ से लिया गया है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हजारों क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों ने इसी उद्घोष के साथ अंग्रेजी शासन का विरोध किया था।
संसद में हो सकती है व्यापक चर्चा-सरकार के इस प्रस्ताव पर संसद के दोनों सदनों में विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। विभिन्न राजनीतिक दल विधेयक के कानूनी, संवैधानिक और व्यावहारिक पहलुओं पर अपनी राय रख सकते हैं। विधेयक पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और अधिसूचना जारी होने के बाद यह कानून प्रभावी होगा।





