नई दिल्ली। भारत-चीन सीमा विवाद में अक्साई चिन सबसे प्रमुख विवादित क्षेत्रों में से एक है। भारत सरकार के अनुसार लगभग 38,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर चीन का कब्जा है। यह क्षेत्र वर्तमान में चीन के नियंत्रण में है, जबकि भारत लगातार इसे अपना अभिन्न हिस्सा बताता रहा है।
अक्साई चिन में चीन ने 1950 के दशक में अपना प्रभाव और आधारभूत ढांचा बढ़ाना शुरू किया था। 1957 में चीन ने शिनजियांग और तिब्बत को जोड़ने वाली G219 सड़क का निर्माण पूरा किया, जिसका एक बड़ा हिस्सा अक्साई चिन से होकर गुजरता है। इसके बाद इस क्षेत्र को लेकर भारत और चीन के बीच विवाद और गहरा गया।
1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद चीन ने अक्साई चिन पर अपना नियंत्रण कायम रखा। तब से यह क्षेत्र चीन के वास्तविक नियंत्रण में है। हालांकि भारत ने कभी भी इस क्षेत्र पर चीन के दावे को स्वीकार नहीं किया और इसे भारतीय भू-भाग का हिस्सा माना है।
भारत-चीन सीमा का बड़ा हिस्सा अभी भी पूरी तरह से सीमांकित नहीं है और दोनों देशों की वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को लेकर कई क्षेत्रों में अलग-अलग धारणाएं हैं। इसी वजह से अक्साई चिन सहित लद्दाख के कई इलाकों में सीमा विवाद आज भी दोनों देशों के बीच संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।
गौरतलब है कि भारत का दावा केवल अक्साई चिन तक सीमित नहीं है। चीन अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से पर भी दावा करता है, लेकिन अरुणाचल प्रदेश भारत के प्रशासनिक नियंत्रण में है। इस प्रकार भारत-चीन सीमा विवाद ऐतिहासिक दावों, वास्तविक नियंत्रण और दोनों देशों की अलग-अलग सीमा धारणाओं से जुड़ा जटिल मामला है।





