नई दिल्ली, 14 अगस्त। संसद का मानसून सत्र 2026 गुरुवार, 13 अगस्त को हंगामे और राजनीतिक टकराव के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। सत्र की शुरुआत 20 जुलाई को हुई थी और 25 दिनों की अवधि में लोकसभा तथा राज्यसभा की कुल 19 बैठकें हुईं। सरकार ने सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में सफलता हासिल की, वहीं विपक्ष के विरोध और विभिन्न मुद्दों पर हुए हंगामे के कारण सदनों की कार्यवाही पर असर पड़ा।
लोकसभा की उत्पादकता करीब 19 प्रतिशत
संसदीय कार्य मंत्रालय के अनुसार मानसून सत्र के दौरान लोकसभा की उत्पादकता लगभग 19 प्रतिशत और राज्यसभा की करीब 39 प्रतिशत रही। कम उत्पादकता के पीछे सदन में लगातार व्यवधान और राजनीतिक गतिरोध प्रमुख कारणों में रहे। इसके बावजूद सरकार ने कई विधायी कार्य पूरे किए और दोनों सदनों से कुल 12 विधेयक पारित हुए।
12 विधेयक दोनों सदनों से पारित-सत्र के दौरान लोकसभा में 11 और राज्यसभा में 2 विधेयक पेश किए गए। दोनों सदनों से पारित प्रमुख विधेयकों में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल-2026, रजिस्ट्रेशन ऑफ बर्थ्स एंड डेथ्स (अमेंडमेंट) बिल-2026, बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल-2026, एमएसएमई डेवलपमेंट (अमेंडमेंट) बिल-2026, ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल-2026 और माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल-2026 शामिल हैं।
परीक्षा में गड़बड़ी रोकने पर विशेष कानून-सत्र में सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर रोक लगाने से जुड़ा संशोधन विधेयक खास तौर पर महत्वपूर्ण रहा। विधेयक में ऐसे मामलों की जांच और सुनवाई के लिए समयबद्ध व्यवस्था, विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट और विशेष लोक अभियोजकों की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता मजबूत करना है। विधेयक दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी भी प्राप्त कर चुका है।
वंदे मातरम् और केरल के नाम से जुड़े विधेयक भी पारित-सत्र के दौरान राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संशोधन विधेयक भी पारित हुआ। इसमें वंदे मातरम् को लेकर जानबूझकर व्यवधान पैदा करने या उसके गायन को रोकने जैसे कृत्यों को कानून के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने से संबंधित विधेयक भी दोनों सदनों से पारित हुआ।
विपक्ष ने उठाए कई मुद्दे-सत्र के दौरान विपक्ष ने विभिन्न राजनीतिक और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। कई मौकों पर विपक्षी सदस्यों के विरोध और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई। सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष का कहना रहा कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा से बच रही है।
एफसीआरए संशोधन विधेयक संयुक्त समिति को भेजा-विदेशी अंशदान से जुड़े Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill-2026 को दोनों सदनों की संयुक्त समिति के पास विचार और रिपोर्ट के लिए भेजा गया। सरकार की ओर से इसे आगे की संसदीय जांच के बाद आगे बढ़ाने की प्रक्रिया अपनाई गई।
कुल मिलाकर मानसून सत्र में विधायी स्तर पर कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुए, लेकिन सदनों की बेहद कम उत्पादकता ने संसदीय कामकाज को लेकर चिंता भी बढ़ाई है। अब सरकार और विपक्ष दोनों की नजर आगामी सत्र की रणनीति पर रहेगी।





