अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया अब अंतिम दौर में पहुंच गई है। मंदिर के प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज को अधिक व्यवस्थित एवं पेशेवर तरीके से संचालित करने के लिए ट्रस्ट ने इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए देशभर से बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से छंटनी के बाद 18 उम्मीदवारों को अंतिम साक्षात्कार के लिए चुना गया है।
इन उम्मीदवारों के साक्षात्कार 11 और 12 अगस्त को अयोध्या में आयोजित किए जा रहे हैं। चयन प्रक्रिया की जिम्मेदारी तीन सदस्यीय समिति को दी गई है। इस समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली कर रहे हैं। समिति में लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और वैज्ञानिक सुरेश हावरे भी शामिल हैं।
CEO पद के लिए करीब 5,200 से अधिक आवेदन प्राप्त होने की जानकारी सामने आई है। आवेदन करने वालों में प्रशासन, वित्त, सरकारी सेवा और बड़े संस्थानों के प्रबंधन से जुड़े अनुभवी लोग शामिल हैं। चयन के लिए उम्मीदवारों की प्रशासनिक क्षमता, वित्तीय प्रबंधन, नेतृत्व क्षमता और बड़े संस्थान को संचालित करने के अनुभव को प्रमुख आधार माना जा रहा है।
साक्षात्कार के दौरान उम्मीदवारों से मंदिर प्रशासन से जुड़े संभावित मुद्दों पर भी सवाल किए जा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ उम्मीदवारों से उनकी धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत आचरण से जुड़े प्रश्न भी पूछे गए। हालांकि, नियुक्ति के लिए प्रशासनिक दक्षता और लंबे अनुभव को प्रमुख योग्यता माना गया है।
CEO की जिम्मेदारियां होंगी महत्वपूर्ण
राम मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर प्रशासन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, कर्मचारियों के प्रबंधन, दान एवं वित्तीय व्यवस्था, सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय और विभिन्न विकास कार्यों की निगरानी जैसी जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण होंगी।
राम मंदिर के निर्माण के बाद अब मंदिर परिसर और उससे जुड़े क्षेत्रों का विस्तार भी हो रहा है। आने वाले समय में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए ट्रस्ट को एक ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था की जरूरत है, जो बड़े स्तर पर संचालन को प्रभावी ढंग से संभाल सके। इसी वजह से CEO का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चयन समिति देगी नामों का पैनल
साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयन समिति योग्य उम्मीदवारों के नामों का पैनल तैयार करेगी। इसके बाद अंतिम निर्णय श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा लिया जाएगा। नियुक्त होने वाला अधिकारी मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस बीच पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने CEO चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अंतिम चरण में पहुंचे उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक करने की मांग की है। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से चयन प्रक्रिया को लेकर अंतिम निर्णय अभी बाकी है।
राम मंदिर के नियमित संचालन और बढ़ते प्रशासनिक दायरे को देखते हुए पहले पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति को ट्रस्ट के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि नियुक्ति के बाद मंदिर के प्रशासनिक कामकाज में जिम्मेदारियों का अधिक स्पष्ट और पेशेवर बंटवारा हो सकेगा।





