जयपुर। राजस्थान सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की संभावनाओं के मद्देनज़र विभिन्न पक्षों से सुझाव लेने के लिए आयोजित की जा रही जनसुनवाई को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। राजस्थान कांग्रेस ने इस पूरी प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए इसका विरोध किया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने इस संबंध में राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जनसुनवाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पत्र में उन्होंने कहा है कि सरकार ने अब तक समान नागरिक संहिता से संबंधित किसी भी कानून का मसौदा (ड्राफ्ट) सार्वजनिक नहीं किया है। साथ ही, न तो प्रस्तावित कानून का प्रारूप जारी किया गया है और न ही उस पर औपचारिक रूप से आमजन से सुझाव एवं आक्षेप आमंत्रित किए गए हैं। ऐसे में जनसुनवाई की प्रक्रिया पारदर्शिता और विधिक प्रक्रिया की दृष्टि से उचित नहीं मानी जा सकती।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जनता के समक्ष वास्तविक और ज्वलंत मुद्दों पर जनसुनवाई आयोजित करने तथा उनके समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने के बजाय लोगों का ध्यान मूल समस्याओं से भटकाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी, महंगाई, कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, पेयजल संकट और अन्य जनहित के मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण हैं, जिन पर सरकार को प्राथमिकता से ध्यान देना चाहिए।
कांग्रेस का कहना है कि समान नागरिक संहिता जैसा संवेदनशील और व्यापक प्रभाव वाला विषय केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह सकता। पार्टी का मानना है कि इस पर सभी धर्मों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों तथा राजनीतिक दलों के साथ व्यापक संवाद और विचार-विमर्श होना चाहिए। कांग्रेस ने सरकार से जनसुनवाई की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने और सभी पक्षों की सहमति के बाद ही आगे बढ़ने की मांग की है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पत्र में यह भी कहा कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को अपने धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा का अधिकार देता है। ऐसे में किसी भी बड़े कानूनी बदलाव से पहले लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप व्यापक चर्चा आवश्यक है।
वहीं, राजस्थान सरकार का कहना है कि समान नागरिक संहिता के संबंध में आमजन, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों से सुझाव प्राप्त करने के उद्देश्य से जनसुनवाई आयोजित की जा रही है। सरकार का दावा है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य सभी हितधारकों की राय जानना है, ताकि भविष्य में किसी भी निर्णय से पहले व्यापक जनमत का आकलन किया जा सके।
समान नागरिक संहिता को लेकर देशभर में पहले से ही राजनीतिक और वैचारिक बहस जारी है। ऐसे में राजस्थान में शुरू हुई जनसुनवाई और उस पर कांग्रेस के विरोध ने इस मुद्दे को प्रदेश की राजनीति के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस विषय पर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।


