नई दिल्ली, 15 अगस्त। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को लेकर बड़ा लक्ष्य सामने रखा। उन्होंने कहा कि देश परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में भारत 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने की दिशा में काम करेगा। इसके लिए देश में नए परमाणु रिएक्टरों की स्थापना पर जोर दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को पर्याप्त, भरोसेमंद और स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता होगी। ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता कम करना भी जरूरी है। परमाणु ऊर्जा को इसी व्यापक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
पांच नए रिएक्टरों पर काम
पीएम मोदी ने कहा कि देश में पांच नए परमाणु रिएक्टरों की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य भारत की परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को बढ़ाना और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए मजबूत आधार तैयार करना है।
परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन में वृद्धि होने से कोयला, तेल और गैस जैसे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। सरकार इसे स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार और कार्बन उत्सर्जन घटाने की भारत की प्रतिबद्धता से भी जोड़ रही है।
विकसित भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा जरूरी
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए ऊर्जा सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। उद्योग, परिवहन, डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृषि और घरेलू जरूरतों के लिए आने वाले वर्षों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ने की संभावना है। ऐसे में भारत को बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन की क्षमता तैयार करनी होगी।
परमाणु ऊर्जा लगातार बिजली उपलब्ध कराने वाले स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों के साथ परमाणु ऊर्जा को जोड़कर देश के ऊर्जा मिश्रण को मजबूत करने की रणनीति पर जोर दिया जा रहा है।
परमाणु क्षेत्र में निजी भागीदारी की तैयारी
भारत परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। सरकार का मानना है कि बड़े निवेश, आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता के जरिए परमाणु ऊर्जा उत्पादन को तेजी से विस्तार दिया जा सकता है।
इसके साथ ही परमाणु सुरक्षा, नियमन और उच्च तकनीकी मानकों को बनाए रखना भी सरकार की प्राथमिकता होगी। भारत लंबे समय से परमाणु ऊर्जा को अपनी दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता रहा है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता से अर्थव्यवस्था को भी मजबूती
परमाणु ऊर्जा क्षमता में विस्तार का असर केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा। इससे ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने, औद्योगिक उत्पादन को स्थिर बिजली उपलब्ध कराने और दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में मदद मिल सकती है।
प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट है कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और स्वच्छ ऊर्जा तीनों मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा। 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य इसी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।





