नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र से पहले देश में परिसीमन (Delimitation) को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों की ओर से लगातार यह आशंका जताई जा रही थी कि केंद्र सरकार मौजूदा मानसून सत्र में परिसीमन से संबंधित विधेयक (बिल) ला सकती है। हालांकि, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इन अटकलों पर विराम लगाते हुए सरकार का रुख स्पष्ट कर दिया है।
किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार के वर्तमान विधायी एजेंडे में परिसीमन से जुड़ा कोई बिल शामिल नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानसून सत्र के लिए सरकार जिन विधेयकों को लाने की तैयारी कर रही है, उनमें परिसीमन विधेयक का कोई प्रस्ताव नहीं है।
विपक्ष की आशंकाओं पर सरकार का जवाब-हाल के दिनों में कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार परिसीमन की प्रक्रिया को जल्द आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। विशेष रूप से दक्षिण भारत के कई राज्यों ने जनसंख्या के आधार पर संभावित सीटों के पुनर्वितरण को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि केवल जनसंख्या को आधार बनाया गया तो परिवार नियोजन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।
इन आशंकाओं के बीच रिजिजू के बयान को सरकार की आधिकारिक स्थिति माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार फिलहाल ऐसे किसी विधेयक को संसद में पेश करने की योजना नहीं बना रही है।
परिसीमन क्या है?
परिसीमन वह प्रक्रिया है जिसके तहत जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं तथा सीटों का पुनर्निर्धारण किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या यथासंभव संतुलित रहे।
भारत में अंतिम बार व्यापक परिसीमन 2002 में गठित परिसीमन आयोग की सिफारिशों के आधार पर हुआ था, जिसे 2008 से लागू किया गया। संविधान के अनुसार वर्तमान में लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण पर लगी रोक 2026 के बाद समाप्त होनी है। इसके बाद अगली जनगणना के आंकड़ों के आधार पर आगे की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
मानसून सत्र में किन मुद्दों पर रहेगा फोकस?
सरकार का कहना है कि मानसून सत्र में आर्थिक सुधार, विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े लंबित विधेयकों और जनहित से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा और कानून बनाने को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार ने सभी दलों से सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में सहयोग की अपील भी की है।
राजनीतिक महत्व-परिसीमन का मुद्दा आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण विषय माना जा रहा है, क्योंकि इसका सीधा संबंध संसद और विधानसभाओं में राज्यों के प्रतिनिधित्व से है। हालांकि, किरेन रिजिजू के ताजा बयान से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि मौजूदा मानसून सत्र में परिसीमन बिल लाने या पारित कराने की सरकार की कोई योजना नहीं है।





