इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) के इस्तेमाल पर लगे प्रतिबंध को एक बार फिर बढ़ा दिया है। पाकिस्तान विमानपत्तन प्राधिकरण (Pakistan Airports Authority-PAA) ने शनिवार को जारी नोटिस टू एयरमेन (NOTAM) के माध्यम से घोषणा की कि यह प्रतिबंध अब 24 अगस्त तक प्रभावी रहेगा।
पीएए के अनुसार यह प्रतिबंध भारत में रजिस्टर्ड, संचालित, स्वामित्व वाले और लीज पर लिए गए सभी विमानों पर लागू होगा। इसमें यात्री विमान, कार्गो विमान और सैन्य विमान सभी शामिल हैं। यानी इस अवधि के दौरान कोई भी भारतीय विमान पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का उपयोग नहीं कर सकेगा।
पहले भी कई बार बढ़ाया जा चुका है प्रतिबंध-यह निर्णय उस समय लिया गया है, जब मौजूदा प्रतिबंध 24 जुलाई को समाप्त होने वाला था। निर्धारित समय सीमा खत्म होने से करीब छह दिन पहले ही पाकिस्तान ने इसे एक महीने के लिए और बढ़ाने का फैसला कर लिया। इससे स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क को लेकर फिलहाल किसी राहत की संभावना नहीं है।
भारतीय एयरलाइंस पर पड़ेगा असर-पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र बंद रहने से भारत से यूरोप, मध्य एशिया, पश्चिम एशिया और उत्तरी अमेरिका जाने वाली कई उड़ानों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ता है। इसके कारण—उड़ान का समय बढ़ जाता है।ईंधन की खपत अधिक होती है।एयरलाइंस की परिचालन लागत बढ़ती है। कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए पर भी असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक एयरस्पेस बंद रहने से भारतीय विमानन कंपनियों पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
NOTAM में क्या कहा गया?
पाकिस्तान विमानपत्तन प्राधिकरण की ओर से जारी NOTAM में स्पष्ट किया गया है कि भारतीय सैन्य और नागरिक विमानों पर लगाया गया प्रतिबंध पहले की तरह जारी रहेगा। यह आदेश भारत में पंजीकृत, संचालित या भारतीय स्वामित्व वाले सभी विमानों पर लागू होगा।
भारत-पाक संबंधों में तनाव बरकरार-भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जारी राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी तनाव का असर विमानन क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ान सेवाएं पहले से बंद हैं और अब एयरस्पेस प्रतिबंध बढ़ने से द्विपक्षीय संपर्क और सीमित हो गया है।
फिलहाल पाकिस्तान की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि 24 अगस्त के बाद प्रतिबंध हटाया जाएगा या स्थिति की समीक्षा के आधार पर इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन करने वाली एयरलाइंस आने वाले हफ्तों में भी वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करती रहेंगी।





