नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक में रेलवे अवसंरचना को मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण परियोजना को मंजूरी दी गई है। समिति ने कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच बल्लारी–गुंतकल रेलखंड पर तीसरी और चौथी रेलवे लाइन बिछाने की परियोजना को स्वीकृति प्रदान की है। इस परियोजना पर 1,264 करोड़ रुपये की लागत आएगी और इसे वित्त वर्ष 2028-29 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने मंत्रिमंडलीय समिति की जानकारी देते हुए बताया कि यह मल्टीट्रैकिंग परियोजना रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने, ट्रेनों की आवाजाही को सुगम बनाने और माल एवं यात्री परिवहन को अधिक तेज, सुरक्षित तथा कुशल बनाने की दिशा में अहम कदम साबित होगी। वर्तमान में इस रेलखंड पर ट्रेनों का दबाव अधिक होने के कारण परिचालन प्रभावित होता है। नई लाइनें बनने के बाद इस समस्या में काफी कमी आएगी।
99 गांवों को मिलेगा सीधा लाभ
इस परियोजना का लाभ कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के लगभग 99 गांवों को मिलेगा। बेहतर रेल संपर्क से स्थानीय लोगों की आवाजाही आसान होगी, वहीं कृषि, उद्योग और व्यापार को भी नई गति मिलेगी। परियोजना से क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।
माल परिवहन होगा तेज
बल्लारी क्षेत्र लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट और अन्य औद्योगिक उत्पादों का प्रमुख केंद्र है। रेलवे मंत्रालय का मानना है कि तीसरी और चौथी लाइन बनने से मालगाड़ियों की क्षमता बढ़ेगी और बंदरगाहों तथा औद्योगिक क्षेत्रों तक सामान की ढुलाई पहले की तुलना में अधिक तेज और सुगम होगी। इससे लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी और उद्योगों को लाभ मिलेगा। पटरियों की संख्या बढ़ने से रेलवे सालाना 16.22 मिलियन टन (MTPA) अतिरिक्त माल ढो सकेगी।
पर्यावरण संरक्षण में भी मिलेगी मदद
सरकार का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद बड़ी मात्रा में माल सड़क के बजाय रेल मार्ग से परिवहन किया जा सकेगा। इससे ईंधन की बचत होगी, कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही सड़क यातायात का दबाव भी कम होगा।
रेल नेटवर्क होगा अधिक मजबूत
केंद्र सरकार के अनुसार, यह परियोजना भारतीय रेलवे के मल्टीट्रैकिंग कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य व्यस्त रेल मार्गों पर क्षमता बढ़ाना और परिचालन को अधिक कुशल बनाना है। इससे ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार होगा, नई यात्री और मालगाड़ियों के संचालन का रास्ता खुलेगा तथा क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
सरकार का कहना है कि 2028-29 तक परियोजना पूरी होने के बाद कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच रेल संपर्क और अधिक मजबूत होगा, जिससे यात्रियों, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।





