नई दिल्ली, 13 अगस्त। संसद के मानसून सत्र के दौरान विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। लोकसभा ने विधेयक को आगे की विस्तृत जांच के लिए 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का फैसला किया। सरकार की ओर से कहा गया कि समिति विधेयक के प्रावधानों की व्यापक समीक्षा करेगी और आवश्यक सुझावों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
विपक्ष ने विधेयक वापस लेने की मांग की
विधेयक को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और डीएमके समेत कई विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए। विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित बदलाव विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी, धार्मिक और सामाजिक संगठनों के कामकाज पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगा सकते हैं। कुछ विपक्षी दलों ने विधेयक को वापस लेने की मांग भी की।
वहीं सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विधेयक का उद्देश्य विदेशी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को मजबूत करना है। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित बदलाव किसी विशेष समुदाय या संस्था को निशाना बनाने के लिए नहीं हैं।
31 सदस्यीय समिति करेगी जांच
लोकसभा में विधेयक को 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने का प्रस्ताव रखा गया। समिति में लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के सदस्य शामिल होंगे। समिति विधेयक के विभिन्न प्रावधानों का अध्ययन करने के साथ-साथ संबंधित पक्षों और विशेषज्ञों के सुझाव भी ले सकती है।
JPC को विधेयक भेजे जाने का मतलब यह नहीं है कि विधेयक खारिज हो गया है। समिति की जांच और रिपोर्ट के बाद विधेयक पर आगे की संसदीय प्रक्रिया तय होगी।
क्या है FCRA और क्यों महत्वपूर्ण है विधेयक?
विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी FCRA विदेशी स्रोतों से मिलने वाले धन के स्वीकार और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी धन का उपयोग निर्धारित कानूनी और सामाजिक उद्देश्यों के अनुरूप हो।
विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य FCRA व्यवस्था में मौजूद व्यावहारिक कमियों को दूर करना तथा पारदर्शिता और सुशासन को मजबूत करना है।
विदेशी फंड से बनी संपत्तियों को लेकर प्रस्ताव
विधेयक के प्रमुख प्रावधानों में ऐसे संगठनों की विदेशी फंड से बनी संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़ा प्रस्ताव भी शामिल है, जिनका FCRA पंजीकरण समाप्त हो जाता है, रद्द हो जाता है या उसका नवीनीकरण नहीं होता। सरकार ने ऐसी संपत्तियों की सुरक्षा और उनके प्रबंधन के लिए नामित प्राधिकरण की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है।
इसके अलावा विधेयक FCRA के तहत काम करने वाली संस्थाओं में जवाबदेही और अनुपालन व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़े बदलाव भी प्रस्तावित करता है।
अब JPC की रिपोर्ट पर रहेगी नजर
विधेयक को JPC के पास भेजे जाने के बाद अब समिति की जांच और उसकी रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। समिति के सुझावों के आधार पर विधेयक में बदलाव किए जा सकते हैं। इसके बाद सरकार इसे संसद में आगे की मंजूरी के लिए ला सकती है।
इस घटनाक्रम को सरकार और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक खींचतान के बीच एक महत्वपूर्ण संसदीय कदम माना जा रहा है। विधेयक पर आगे होने वाली JPC की बैठकों और उसमें विपक्ष की आपत्तियों पर चर्चा पर सभी की नजर रहेगी।





