नई दिल्ली। पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कथित नकदी बरामदगी मामले की जांच करने वाली तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट आज, 12 अगस्त को लोकसभा में पेश की जाएगी। लोकसभा की बुधवार की कार्यसूची के अनुसार, सदन के महासचिव जांच समिति की दो खंडों वाली रिपोर्ट के साथ मौखिक साक्ष्य भी सदन के पटल पर रखेंगे। यह प्रक्रिया जजेज (इंक्वायरी) एक्ट, 1968 के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पूरी की जा रही है।
मई में स्पीकर को सौंपी गई थी रिपोर्ट
जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े आरोपों की जांच के लिए गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट 18 मई 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंप दी थी। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने की थी। इसमें बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर और कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य भी शामिल थे। लोकसभा सचिवालय के मुताबिक रिपोर्ट वैधानिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार की गई है।
आग के बाद सामने आया था मामला
यह पूरा मामला मार्च 2025 में उस समय सामने आया था, जब दिल्ली स्थित जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास में आग लगने के बाद परिसर के एक हिस्से में कथित तौर पर बड़ी मात्रा में जली हुई नकदी मिलने की बात सामने आई थी। इसके बाद मामले ने न्यायपालिका की जवाबदेही और न्यायाधीशों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर देशभर में चर्चा पैदा कर दी।
जस्टिस वर्मा ने जांच के दौरान आरोपों से इनकार किया था। उन्होंने समिति के समक्ष कहा था कि घटना के समय वह दिल्ली में मौजूद नहीं थे और नकदी की बरामदगी से संबंधित दावों को लेकर उन्होंने सवाल उठाए थे। उन्होंने यह भी तर्क दिया था कि उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए कथित नकदी की बरामदगी का ठोस आधिकारिक प्रमाण होना चाहिए।
स्पीकर ने अगस्त 2025 में गठित की थी समिति
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 12 अगस्त 2025 को जजेज (इंक्वायरी) एक्ट, 1968 के तहत तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। यह कदम जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों और उनके खिलाफ शुरू की गई पद से हटाने की प्रक्रिया के बाद उठाया गया था।
अप्रैल 2026 में दे चुके हैं इस्तीफा
इस मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम अप्रैल 2026 में हुआ, जब जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उनके इस्तीफे के बाद उन्हें पद से हटाने की संसदीय प्रक्रिया का व्यावहारिक महत्व काफी हद तक खत्म हो गया, लेकिन जांच समिति की रिपोर्ट को संसद के पटल पर रखने की प्रक्रिया जारी रही।
रिपोर्ट से क्या सामने आएगा?
अब सबकी नजर लोकसभा में पेश होने वाली रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट में समिति ने आरोपों, उपलब्ध दस्तावेजों और मौखिक साक्ष्यों की जांच के आधार पर अपने निष्कर्ष दर्ज किए हैं। समिति के समक्ष पेश किए गए साक्ष्यों को लेकर अप्रैल में उसके सहयोगी वकीलों ने दावा किया था कि आरोपों को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है।
रिपोर्ट लोकसभा के पटल पर रखे जाने के बाद इसके निष्कर्ष सार्वजनिक संसदीय रिकॉर्ड का हिस्सा बन जाएंगे। हालांकि, जस्टिस वर्मा के इस्तीफे के कारण उनके खिलाफ पद से हटाने की कार्रवाई का सवाल अलग स्थिति में पहुंच चुका है। ऐसे में आज पेश होने वाली रिपोर्ट न्यायपालिका में जवाबदेही, न्यायाधीशों के खिलाफ जांच की प्रक्रिया और इस पूरे विवाद के तथ्यात्मक पहलुओं के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।





