नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। होरमुज़ जलडमरूमध्य में पहले से बनी अस्थिर स्थिति के बीच अब यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जहाजों की समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है। इस घोषणा के बाद वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर इसके असर को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
बता दें कि यमन के हूती आंदोलन के प्रवक्ता याह्या सरी ने सोमवार को अपने आधिकारिक सामाजिक माध्यम खाते पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि सऊदी अरब के जहाजों के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी तत्काल प्रभाव से लागू की जा रही है। हूती संगठन का दावा है कि यह कदम यमन की राजधानी सना पर सऊदी अरब की ओर से लगाए गए दबाव और घेराबंदी के जवाब में उठाया गया है।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह सऊदी अरब ने सना हवाई अड्डे पर हमला किया था। इसके बाद हूती विद्रोहियों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए दक्षिणी सऊदी अरब के एक हवाई अड्डे को निशाना बनाया। मौजूद जानकारी के अनुसार वर्ष 2022 में हुए युद्धविराम के बाद दोनों पक्षों के बीच यह सबसे गंभीर सैन्य तनाव माना जा रहा है।
इस नए घटनाक्रम ने पहले से प्रभावित वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंता और बढ़ा दी है। दरअसल, होरमुज़ जलडमरूमध्य में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव के कारण तेल परिवहन पहले ही प्रभावित हो चुका है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के कुल कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता रहा है। ऐसे में अब यदि लाल सागर का रास्ता भी बाधित होता है तो अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति पर दबाव और बढ़ सकता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार होरमुज़ जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने के बाद सऊदी अरब ने अपने अधिकांश कच्चे तेल के निर्यात को लाल सागर के यनबू बंदरगाह के रास्ते भेजना शुरू कर दिया था। पिछले महीने इस बंदरगाह से प्रतिदिन लगभग 41 लाख 90 हजार बैरल कच्चे तेल का निर्यात हुआ, जो अब तक का सबसे अधिक स्तर माना गया। इससे वैश्विक बाजार में आपूर्ति बनाए रखने में कुछ राहत मिली थी।
हालांकि अब यही मार्ग भी खतरे में दिखाई दे रहा है। लाल सागर से गुजरने वाले तेल टैंकर पहले भी हूती विद्रोहियों के हमलों का सामना कर चुके हैं। यदि इस मार्ग पर बड़े पैमाने पर रुकावट आती है तो तेल की ढुलाई धीमी पड़ सकती है और कई देशों को वैकल्पिक समुद्री रास्तों का सहारा लेना पड़ सकता है। इससे परिवहन लागत बढ़ने के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी आ सकती है।
ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में भी इस घटनाक्रम का असर देखने को मिला। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चा तेल मामूली बढ़त के साथ लगभग 88.23 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता देखा गया। निवेशकों के बीच एक ओर संघर्ष और बढ़ने की आशंका है, जबकि दूसरी ओर कूटनीतिक समाधान की उम्मीद भी बनी हुई है।
बता दें कि वर्ष 2023 के अंत में भी हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास कई महीनों तक समुद्री गतिविधियों को प्रभावित किया था। उस दौरान एशिया और यूरोप के बीच सबसे छोटा समुद्री व्यापार मार्ग लगभग ठप हो गया था और अनेक जहाजों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ा था। ऐसे में ताजा नाकेबंदी की घोषणा को वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार के लिए एक गंभीर चुनौती के रूप में देखा जा रहा हैं।





