नई दिल्ली। केंद्र सरकार और सीजीपी (CJP) के प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई अहम बैठक में कई प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद संगठन ने अपना आंदोलन वापस लेने की घोषणा कर दी। करीब तीन घंटे तक चली बैठक में छात्रों और युवाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। सरकार की ओर से दो केंद्रीय मंत्रियों ने प्रतिनिधिमंडल को कई मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया।
बैठक के बाद सीजीपी ने कहा कि सरकार ने संगठन की प्रमुख मांगों को गंभीरता से सुना और उन पर आगे बढ़ने का आश्वासन दिया है। इसी के मद्देनजर फिलहाल आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार अपने आश्वासनों पर अमल नहीं करती है तो भविष्य में आंदोलन दोबारा शुरू करने का अधिकार सुरक्षित रहेगा।
बैठक में सबसे अहम मुद्दा पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का रहा। संगठन ने इसे अपनी प्रमुख मांगों में शामिल बताया और कहा कि इस्तीफे के बाद इस मांग को पूरा माना गया है।

इसके अलावा प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर और अन्य कानूनी मामलों की समीक्षा पर भी सहमति बनी। सरकार ने आश्वासन दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच कर आवश्यकतानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में नीट (NEET) पेपर लीक प्रकरण से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। सरकार ने पीड़ित परिवारों की सहायता के सिद्धांत पर सहमति जताई, जबकि मुआवजे की राशि और प्रक्रिया का निर्णय नियमानुसार किए जाने की बात कही।
सीजीपी ने परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग भी उठाई। इस पर सरकार ने भविष्य में पेपर लीक रोकने, परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने तथा परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक सुधार लागू करने का भरोसा दिया।
दोनों पक्षों के बीच इस बात पर भी सहमति बनी कि छात्रों और युवाओं से जुड़े अन्य मुद्दों के समाधान के लिए सरकार और सीजीपी के बीच नियमित संवाद जारी रहेगा। सरकार ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बातचीत के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकालने के लिए वह प्रतिबद्ध है।
बैठक के बाद सीजीपी के प्रतिनिधियों ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य छात्रों और युवाओं की आवाज सरकार तक पहुंचाना था। सरकार के सकारात्मक रुख और मिले आश्वासनों को देखते हुए संगठन ने फिलहाल आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया है। हालांकि संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि तय समय में आश्वासनों पर अमल नहीं हुआ तो वह आगे की रणनीति तय करेगा।





