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राज्यसभा में आज 'वंदे मातरम्' विधेयक पर होगी अहम बहस, कांग्रेस बोली- नए कानून की जरूरत नहीं

सरकार का कहना है कि 'वंदे मातरम्' केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रीय अस्मिता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। ऐसे में इसके सम्मान की रक्षा के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान आवश्यक हैं। सरकार का मानना है कि इस कानून से राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना और मजबूत होगी

NSI Admin27 Jul 2026, 04:21 AM27 views2 min read
राज्यसभा में आज 'वंदे मातरम्' विधेयक पर होगी अहम बहस, कांग्रेस बोली- नए कानून की जरूरत नहीं

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह की शुरुआत के साथ ही सोमवार को राज्यसभा में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' विधेयक पर अहम बहस होने की संभावना है। सरकार की ओर से शुक्रवार को सदन में पेश किए गए इस विधेयक पर आज चर्चा कराने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के सम्मान को कानूनी संरक्षण देना तथा उसके अपमान को दंडनीय अपराध की श्रेणी में शामिल करना है।

सरकार का कहना है कि 'वंदे मातरम्' केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रीय अस्मिता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। ऐसे में इसके सम्मान की रक्षा के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान आवश्यक हैं। सरकार का मानना है कि इस कानून से राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना और मजबूत होगी।

कांग्रेस ने जताई आपत्ति

विधेयक को लेकर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि 'वंदे मातरम्' पहले से ही करोड़ों भारतीयों की भावनाओं से जुड़ा राष्ट्रीय गीत है और इसके सम्मान के लिए अलग से कानून बनाने की कोई आवश्यकता नहीं है। पार्टी का तर्क है कि सम्मान कानून से नहीं, बल्कि नागरिकों की भावना और संस्कारों से सुनिश्चित होता है।

वाम दलों ने भी किया विरोध

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-एम) सहित कुछ अन्य विपक्षी दलों ने भी विधेयक का विरोध किया है। उनका कहना है कि इस कानून का दुरुपयोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने या राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए किया जा सकता है।

सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर विधेयक वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत का सम्मान देशवासियों की भावना से जुड़ा विषय है और इसे दंडात्मक कानून का रूप देना उचित नहीं होगा।

सरकार और विपक्ष आमने-सामने

यदि सोमवार को राज्यसभा में इस विधेयक पर चर्चा होती है तो सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। सरकार विधेयक को राष्ट्रहित और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे अनावश्यक और संभावित दुरुपयोग वाला कानून करार दे रहा है।

आज की बहस पर रहेगी नजर

संसदीय कार्यवाही पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि सदन में सुचारु रूप से चर्चा होती है तो विधेयक की आगे की प्रक्रिया बढ़ सकती है। वहीं, हंगामे या सहमति नहीं बनने की स्थिति में इसकी चर्चा और पारित होने की प्रक्रिया आगे टल सकती है।

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