श्री राम जन्मभूमि मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे में कथित गबन का मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति में तूफान ला खड़ा हुआ है। आरोपों के अनुसार, मंदिर के दानपात्रों से करोड़ों रुपये, चांदी की ईंटें तथा अन्य सामग्री गायब हुई है। विपक्षी दलों ने इसे बड़े घोटाले का रूप देते हुए केंद्र और राज्य सरकार पर हमला बोला है, जबकि सत्ताधारी पक्ष इसे आंतरिक कर्मचारियों की मिलीभगत बताकर विपक्ष पर आस्था को राजनीतिक हथियार बनाने का आरोप लगा रहा है।
SIT जांच क्या कहती है ?
विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट और पुलिस छानबीन के अनुसार, चढ़ावा गिनने वाले कुछ कर्मचारियों ने संगठित तरीके से चोरी की। सीसीटीवी फुटेज में अप्रैल से जून के बीच करीब 70 संदिग्ध घटनाएं दर्ज हुईं। मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के घरों से नकदी, आभूषण और संपत्ति दस्तावेज बरामद हुए हैं। मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है। ट्रस्ट की बैठक में नई व्यवस्था बनाने पर विचार हो रहा है।
पुलिस ने साइबर सेल की मदद से डिलीट डेटा रिकवर कर 2 करोड़ रुपये से अधिक की चोरी के चैट्स भी सामने निकाले हैं। यह स्पष्ट रूप से आंतरिक लापरवाही और लालच की कहानी लगती है।
विपक्ष का आक्रोश-समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, कांग्रेस की प्रियंका गांधी वाड्रा और आप के अरविंद केजरीवाल सहित विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगा है। उन्होंने मंदिर ट्रस्ट पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया और कोर्ट मॉनिटरिंग वाली जांच की मांग की। कुछ नेताओं ने अयोध्या पहुंचकर मुद्दे को और तूल दिया।
विपक्ष का यह अचानक राम भक्ति-विपक्ष का यह अचानक राम भक्ति का प्रदर्शन कई सवाल खड़े करता है। वे वही दल और नेता हैं जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन का लंबे समय तक विरोध किया था। अब चोरी के मामले में अचानक आस्था की रक्षा करने वाले बन गए हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं।
BJP-VHP का पलटवार-विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने SIT को पत्र लिखकर विपक्षी नेताओं से पूछताछ की मांग की है। उनका कहना है कि बिना सबूत के आरोप लगाकर हिंदू आस्था को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर “भारत की आस्था पर हमला” करने का आरोप लगाया और जनता से सतर्क रहने की अपील की।
तथ्य यह हैं कि चोरी करने वाले कर्मचारी थे, जांच यूपी सरकार की SIT कर रही है और दोषियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। हिंदू धार्मिक स्थलों को जानबूझकर बदनाम करने वाली कोई बड़ी साजिश यदि है तो वह कामयाब होती नजर नहीं आ रही है।
सबक और आगे की राह-राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है। भक्तों का चढ़ावा पवित्र है। इसे लूटने की कोई भी घटना निंदनीय है। मंदिर प्रबंधन को तत्काल पारदर्शी लेखा-परीक्षा प्रणाली, बेहतर सीसीटीवी निगरानी, स्वतंत्र ऑडिट और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए। अन्य प्रसिद्ध मंदिरों (जैसे तिरुपति बालाजी) के मॉडल को अपनाया जा सकता है।
विपक्ष को राजनीतिक लाभ के बजाय निष्पक्ष जांच पर जोर देना चाहिए। सरकार को भी दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर जनता का विश्वास बहाल करना होगा।
राम राज में सत्य, न्याय और शुद्धता सर्वोपरि है। एक चोरी की घटना पूरे राम मंदिर आंदोलन की पवित्रता को नहीं मिटा सकती, लेकिन इससे सबक लेकर व्यवस्था को मजबूत करना समय की मांग है। जनता उम्मीद करती है कि इस मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर आस्था की रक्षा की जाएगी।




