
भोपाल । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शुक्रवार को भोपाल में स्पष्ट शब्दों में कहा कि संघ कोई अर्धसैनिक (पैरामिलिट्री) संगठन नहीं है और इसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नजरिए से समझने की कोशिश करना एक बड़ी भूल होगी। यह बयान संघ के शताब्दी वर्ष के तहत आयोजित ‘प्रबुद्ध जन सम्मेलन’ में दिया गया।
मोहन भागवत ने कहा, “हम वर्दी पहनते हैं, मार्च निकालते हैं और दंड (लाठी) अभ्यास करते हैं, लेकिन अगर कोई इसे पैरामिलिट्री संगठन समझता है, तो यह गलत है। संघ एक अनोखा संगठन है, जिसे समझना आसान नहीं है।” उन्होंने आगे जोड़ा कि “अगर आप BJP को देखकर संघ को समझना चाहते हैं, तो यह बहुत बड़ी गलती होगी। यही गलती विद्या भारती या अन्य सहयोगी संगठनों को देखकर भी होगी।”संघ का उद्देश्य क्या है?
- भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ न तो राजनीतिक संगठन है, न ही केवल सेवा संस्था और न ही किसी का रिमोट कंट्रोल।
- संघ का लक्ष्य समाज को एकजुट करना, सद्गुण विकसित करना और भारत को फिर से किसी विदेशी शक्ति के अधीन होने से बचाना है।
- उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवक BJP, विश्व हिंदू परिषद (VHP) या विद्या भारती जैसे संगठनों में काम करते हैं, लेकिन ये संगठन स्वतंत्र रूप से काम करते हैं – संघ किसी को नियंत्रित नहीं करता।
- संघ हिंदू समाज को संगठित करने का आंदोलन है, सत्ता या चुनाव के लिए नहीं।
भ्रांतियां क्यों फैलीं?
- भागवत ने आरोप लगाया कि संघ के खिलाफ झूठा नैरेटिव गढ़ा जा रहा है।
- लोग विकिपीडिया जैसे सतही स्रोतों से जानकारी लेते हैं, जहां सब कुछ सही नहीं होता।
- उन्होंने अपील की कि संघ को समझने के लिए किसी शाखा में आकर देखें – “मीठा कैसे होता है, यह दो घंटे समझाने से नहीं समझ आएगा, चखकर देखो।”
अन्य महत्वपूर्ण बातें
- हिंदुत्व को ‘मनोवृत्ति’ बताया, न कि जाति।
- तीन भाषाएं सीखने पर जोर: राज्य की भाषा, देश की भाषा और दुनिया की भाषा।
- पंच परिवर्तन का आह्वान: सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और नागरिक अनुशासन।
- विदेशी आक्रमणों का जिक्र कर कहा कि समाज में एकता न होने से बार-बार पराजय हुई।