February 1, 2026

 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद रमजान के दौरान गाजा में संघर्ष विराम के ...न्यूयॉर्क, 5 जनवरी 2026: अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस की गिरफ्तारी के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने आपात बैठक बुलाई है।

यह बैठक 5 जनवरी 2026 को सुबह 10 बजे (न्यूयॉर्क समय) होगी। बैठक का एजेंडा “अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरे” रखा गया है।बैठक क्यों बुलाई गई?बैठक का अनुरोध मुख्य रूप से कोलंबिया ने किया, जिसे रूस और चीन का समर्थन मिला।

वेनेजुएला ने भी औपचारिक रूप से अमेरिकी “सैन्य आक्रमण” की निंदा करते हुए तत्काल बैठक की मांग की।
वेनेजुएला के संयुक्त राष्ट्र दूत सैमुअल मोंकाडा ने परिषद के जनवरी माह के अध्यक्ष (सोमालिया के दूत अबुकार दाहिर उस्मान) को पत्र लिखकर अमेरिकी कार्रवाई को “औपनिवेशिक युद्ध” और संप्रभुता का उल्लंघन बताया।

मुख्य मुद्दे जो चर्चा में आएंगे-

*अमेरिकी ऑपरेशन ‘एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ को अंतरराष्ट्रीय कानून (UN चार्टर के आर्टिकल 2(4)) का उल्लंघन मानना।
*संप्रभु देश पर एकतरफा सैन्य हस्तक्षेप और इसके क्षेत्रीय/वैश्विक प्रभाव
*मादुरो शासन के मानवाधिकार उल्लंघनों की जिम्मेदारी, लेकिन सैन्य कार्रवाई को न्यायोचित नहीं ठहराना।
*क्षेत्रीय अस्थिरता, शरणार्थी संकट और तेल बाजार पर असर

UN महासचिव की प्रतिक्रियासंयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने अमेरिकी कार्रवाई को “खतरनाक मिसाल” बताया। उनके प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा:यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान न करने का उदाहरण है।
इससे क्षेत्र में गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

सभी पक्षों से संयम और डी-एस्केलेशन की अपील

महासचिव बैठक में परिषद को ब्रिफिंग देंगे।अपेक्षित स्थितिरूस और चीन (स्थायी सदस्य): अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा करेंगे और प्रस्ताव ला सकते हैं, लेकिन अमेरिका वीटो कर सकता है।
अमेरिका: इसे “नार्को-टेररिज्म” के खिलाफ आत्मरक्षा और न्याय बताया, मादुरो को अवैध तानाशाह करार दिया।
अन्य सदस्य (जैसे फ्रांस, ब्रिटेन): अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन मान सकते हैं, लेकिन मादुरो शासन की भी आलोचना करेंगे।

कोई ठोस प्रस्ताव पारित होना मुश्किल –

यह बैठक 2026 की शुरुआत में वैश्विक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होगी, जहां एकतरफा सैन्य कार्रवाइयों और बहुपक्षीय नियमों के बीच टकराव साफ दिख रहा है। दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या कोई समझौता निकलता है या तनाव और बढ़ता है।

 

 

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