जयपुर, 2 अप्रैल 2026: राजस्थान सरकार ने 31 मार्च की देर रात 65 आईएएस अधिकारियों की बड़ी तबादला सूची जारी की, जिसमें लगभग 25 जिलों के जिला कलेक्टर बदले गए। सबसे ज्यादा चर्चा सीकर के जिला कलेक्टर मुकुल शर्मा की रही, जिन्हें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कार्यालय (CMO) में विशिष्ट सचिव (Special Secretary to CM) नियुक्त किया गया है
उनकी जगह आशीष मोदी को सीकर का नया जिला कलेक्टर बनाया गया है। मुकुल शर्मा करीब डेढ़ साल तक सीकर में कलेक्टर रहे।यह तबादला इसलिए चर्चा में है क्योंकि दिसंबर 2025 में सीकर नगर परिषद में वन एवं पर्यावरण मंत्री तथा सीकर प्रभारी मंत्री संजय शर्मा के साथ मुकुल शर्मा का सार्वजनिक विवाद हुआ था।

विवाद क्या था?दिसंबर 2025 में मंत्री संजय शर्मा शहरी सेवा शिविर (जन समस्या निस्तारण शिविर) के औचक निरीक्षण पर सीकर नगर परिषद पहुंचे। वहां उन्होंने अव्यवस्था, कर्मचारियों की अनुपस्थिति, रजिस्टर में अनियमितता और जनसमस्याओं के निस्तारण में लापरवाही देखी। नाराज मंत्री ने अधिकारियों को फटकार लगाई और कागजात फेंक दिए।जब मंत्री कर्मचारियों को “चोर” तक कह रहे थे, तब कलेक्टर मुकुल शर्मा ने मौजूद अधिकारियों का बचाव किया। इससे मंत्री और कलेक्टर के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। नाराज मंत्री संजय शर्मा ने कहा, “कलेक्टर साहब, आप इन चोरों को मत बचाओ… मैं जा रहा हूं और इसकी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को दूंगा”। इसके बाद वे शिविर के बीच ही रवाना हो गए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।उस समय कई दिनों तक इस विवाद की चर्चा रही और मंत्री द्वारा कलेक्टर की शिकायत मुख्यमंत्री से करने की बात कही गई थी।

तबादला: पंगा हुआ, प्रमोशन भी मिला
लगभग तीन-चार महीने बाद जारी तबादला सूची में मुकुल शर्मा को न केवल सीकर से हटाया गया, बल्कि उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय में महत्वपूर्ण पद पर भेज दिया गया। सियासी गलियारों में इसे “मंत्री से पंगा, लेकिन प्रमोशन चंगा” की संज्ञा दी जा रही है। कई लोग इसे अफसरशाही की मजबूत स्थिति का उदाहरण बता रहे हैं।
मुकुल शर्मा 2013 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। विवाद से पहले भी उनकी पदोन्नति को लेकर चर्चाएं थीं।मंत्री का “वनवास” टूटा?इस तबादले के बाद प्रभारी मंत्री संजय शर्मा के लिए सीकर आने का “वनवास” टूटने की बात कही जा रही है। अब नए कलेक्टर आशीष मोदी जिम्मेदारी संभालेंगे।
यह घटना राजस्थान की राजनीति और प्रशासन के बीच जटिल रिश्तों को फिर से उजागर करती है। सरकारें और मंत्री बदलते रहते हैं, लेकिन कई अधिकारी विभिन्न दलों की सरकारों में अपनी भूमिका बखूबी निभाते रहते हैं ।